शाम के समय वासुदेव तीर्थ स्थल की छठा देखने लायक होती है
अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा। शहर के प्रसिद्घ व ऐतिहासिक वासुदेव तीर्थ स्थल को सावन के चलते भव्य रूप से सजाया गया है। यहां साफ-सफाई से लेकर प्रकाश की उचित व्यवस्था की गई है। शाम के समय विदेशी लाइटों की रंग बिरंगी रोशनी में मंदिर जगमगा उठता है। मंदिर की छठा देखने लायक होती है। पूरे सावन काफी संख्या में शिवभक्त यहां आकर भगवान महादेव की पूजा अर्चना करते हैं और अभिषेक करते हैं। वासुदेव तीर्थ स्थल पर सुरक्षा को लेकर कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। तैयारी पूरी कर ली गई हैं।
ऐसा मानना है कि भगवान श्रीकृष्ण ने यहां आकर तालाब में स्नान किया था, तभी ये तीर्थ वासुदेव तीर्थ स्थल कहलाया है। यहां पर भगवान शिव का विशालकाय शिवलिंग आस्था का केंद्र बना हुआ है। बजरंग बली की पंचमुखी मूर्ति, क्षीर सागर में शेषनाग की सैय्या पर लेटे हुए भगवान वासुदेव की प्रतिमा अपने आप में आस्था का केंद्र बनी हुई है। कई अन्य मंदिर भी यहां स्थापित हैं। इसके अलावा कदम के वृक्ष वासुदेव तीर्थ स्थल की शोभा बढ़ा रहे हैं। इस तीर्थ की प्रसिद्घि दूर-दूर तक विख्यात है। यहां हर रोज श्रद्घालुओं का मेला सा लगा रहता है। सुबह शाम पूजा अर्चना होती है।
वासुदेव प्रबंध समिति के अध्यक्ष शिवस्वरूप टंडन ने बताया कि सावन के चलते वासुदेव तीर्थ स्थल की विशेष सफाई कराई गई है। पूरे सावन यहां काफी संख्या में शिवभक्त पूजा अर्चना करने को आते हैं। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के कड़े बंदोबस्त किए हैं।
प्रसिद्ध शिवालय
अमरोहा भके वासुदेव तीर्थ स्थल के अलावा नौगावां सादात में प्राचीन गजस्थल मंदिर, मंडी धनौरा पत्थर कुटी मंदिर, गजरौला के चाकेश्वर मंदिर, हसनपुर में शिवाला मंदिर प्रशासन ने चिह्नित किए हैं। जहां श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार के भारी तादात में शिव भक्तों व कांवड़ियों का तांता लगता है। मंदिर प्रबंधन ने साफ सफाई से लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। वहीं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन निगरानी रखे है।