बिजनौर। युवा अधिवक्ताओं की बैठक में गंगा व छोईया नदी के प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की गई। नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया गया।
कलक्ट्रेट में हुई बैठक में हितेश विश्नोई ने कहा कि जब तक सरकारें प्रदूषण फैला रहे उद्योगों के खिलाफ सख्त नियम नहीं बनाएंगी तब तक पर्यावरण ही नहीं गंगा भी प्रदूषित होती रहेगी। कहा कि बिजनौर में आधा दर्जन से ज्यादा उद्योग अपना गंदा पानी नदियों में डाल रहे हैं। रवि ढाका ने कहा कि छोईया नदी पूर्ण रूप से प्रदूषित हो चुकी हैं। इसमें जैन डिस्टलरी द्वारा केमिकलयुक्त पानी छोड़ा जा रहा है। छोईया नदी का पानी गंगा में डालने से गंगा भी प्रदूषित हो रही है। नृपेंद्र देशवाल ने कहा कि छोईया नदी जहरीली हो चुकी है। इसके चलते कई गांवों के लोग कैंसर से ग्रस्त हैं। दुधारू पशु भी इन बीमारी का शिकार हो रहे हैं। पिछले कई सालों से गांव वाले छोईया को प्रदूषण मुक्त करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार द्वारा इस संबंध में ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। युवा अधिवक्ताओं ने बैठक में छोईया नदी को प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम कार्यालय में दिया गया। बैठक का संचालन फईम अहमद ने किया। बैठक में अभिषेक वत्स, मोहित चौधरी, शारिक, धर्मेंद्र, अभिषेक चौधरी, जितेंद्र राजपूत, दीपांशु त्यागी, मोहम्मद खालिद, गुलशेर आलम आदि मौजूद रहे।