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Bhadohi News: आप मनाएं सुकून से दिवाली, निगहबान हैं न हम

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ज्ञानपुर। दीपावली का उल्लास हर तरफ है। नौकरी करने वाले घर लौट रहे हैं। मगर कुछ ऐसे भी हैं जो त्योहार पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्यूटी पर तैनात रहेंगे। जिले में चिकित्सक, रेलवेकर्मी, अग्निशमन कर्मी और पुलिसकर्मी लोगों की सुरक्षा के लगातार मुस्तैद रहेंगे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिकित्सकों को दिवाली के दिन 24 घंटे ऑनकाल रहना है। पुलिसकर्मी ड्यूटी पर मुस्तैद हैं।
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त्योहारों पर कुछ विभागों के कर्मचारियों को छुट्टी बहुत मुश्किल मिलती है। पुलिस, स्वास्थ्य और परिवहन से कर्मचारियों और अधिकाारियों का काम बढ़ जाता है। इन विभागों में काम करने वाले परिवार के साथ त्योहार मनाने का सपना एक मन एक कोने में दबा कर रख लेते हैं।
प्रकाश पर्व दीपावली भी ऐसा ही त्योहार है। जिसमें रेलवे, पुलिस, स्वास्थ्य व अग्निशमन से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टी रद्द रहती है। अमर उजाला आज ऐसे ही लोगों से बात कर उनके मन की पीड़ा और कर्तव्य निष्ठा को अपने पाठकों के सामने रखने का कार्य कर रहा है। अमर उजाला ने इन विभागों से जुड़े लोगों से बातचीत की तो उन्होंने ड्यूटी को पहले रखा। हालांकि उनकी बातों पर परिवार के साथ त्योहार न मनाने का अफसोस जरूर दिखा, लेकिन कहीं न कहीं ड्यूटी को उन्होंने प्राथमिकता देने की बात कही।
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प्रतिक्रिया।
अस्पताल में ही मनाएंगे दिवाली
-चिकित्सकीय पेशा में आने के बाद से ही रात की ड्यूटी जिंदगी का हिस्सा सी बन गई है। पिछले तीन साल से परिवार के साथ दिवाली नहीं मनाया। मरीज की जान से बढ़कर कुछ नहीं है। दिवाली परिवार के साथ नहीं मनाने का दुख है, लेकिन फर्ज उससे बड़ा है। - डाॅ. विवेक सिंह, सर्जन जिला चिकित्सालय

- परिवार के साथ दिवाली न मानने का गम है लेकिन ड्यूटी की मजबूरी है। पांच साल से परिवार साथ दिवाली नहीं मना सका हूं। त्योहार से पहले इच्छा रहती है कि घर जाऊंगा, लेकिन छुट्टी नहीं मिल पाती है। अस्पताल में ही दिवाली मनाई जाएगी। प्रांजल शुक्ला, एंबुलेंसकर्मी

- हम लोग भी चाहते हैं कि दीपावली परिवार के साथ मनाई जाए लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाता। पिछले तीन साल पहले घर पर दिवाली मनाई थी। इस बार तो स्टेशन पर ही सहयोगियों के साथ ही दीपावली मनेगी। त्योहारों पर यात्रियों की भीड़ रहती है। बीबी मिश्र, अधीक्षक भदोही रेलवे स्टेशन

- आरक्षण केंद्र में तीन स्टाफ हैं। एक मेडिकल लीव पर है। बाकी दो लोग किसी तरह व्यवस्था बनाए हुए हैं। इसलिए इस बार तो घर नहीं जा सकता। दो वर्ष पूर्व परिवार के साथ दीपावली मनाने का अवसर प्राप्त हुआ था। ड्यूटी पहली प्राथमिकता है।
रणवीर सिंह, आरक्षण पर्यवेक्षक भदोही स्टेशन।
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दिवाली परिवार के साथ न मनाने का मलाल है लेकिन त्योहार पर आग लगने का खतरा रहता है। लिहाजा हमें तो मुस्तैद ही रहना पड़ता है। भगवान से यही दुआ है कि कहीं पर कोई अप्रिय घटना न हो। लोग हंसी-खुशी परिवार के साथ दापीवली मनाएं। -
ओम प्रकाश, अग्निशमन अधिकारी।


कई दिवाली अपनों के साथ बीती है, उम्मीद है आगे भी दिवाली अपनों के बीच मनाने का मौका मिलेगा। दिन में दिवाली मनाते हैं। गांव जाने की इच्छा थी लेकिन किन्हीं कारणों से नहीं जा सका। साथियों के साथ ही आपस में मिठाई बांटकर खुशियां मनाएंगे। -- अनिल कुमार यादव, अग्निशमन

जनता ही अपना परिवार है। उनकी सुरक्षा ही हमारा धर्म है। सोचा था कि इस दिवाली पर गांव जाऊंगा और वहीं पर दिवाली मनाऊगा। संयोग नहीं बन सका। गांव में दिवाली मनाए पांच छह साल से अधिक समय बीत गया। संजय कुमार यादव, थानाध्यक्ष दुर्गागंज।
जिम्मेदारियां ऐसी है कि दूसरों की सेवा में ही समय बीत जाता है। गश्त करने में समय निकल जाता है। जहां भी रुक जाते हैं, वहीं दिवाली मना लेते हैं। कोतवाली में भी पुलिसकर्मियों के साथ दिवाली मनाई जाती है। ड्यूटी ऐसी है कि 24 घंटे मुस्तैद रहना पड़ता है। अश्विनी त्रिपाठी, प्रभारी निरीक्षक ज्ञानपुर
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