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बेटे की दीर्घायु के लिए रखा महिलाओं ने व्रत

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सुरियावां के बावन बीघा तालाब पर पूजन करतीं महिलाएं। - फोटो : BHADOHI
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ज्ञानपुर। पुत्र की सलामती और लंबी उम्र के लिए बृहस्पतिवार को जीवित्पुत्रिका का पर्व जिले में मनाया गया। महिलाओं ने अन्न-जल ग्रहण किए बिना व्रत रखा। दोपहर बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर और पूजा की थाल लेकर व्रती महिलाएं गाजे-बाजे के साथ मंदिरों, गंगा घाटों और सरोवरों के किनारे पहुंचीं। यहां बनाए गए गोंठों में महिलाओं ने जिउतिया माता की पूजा कर सुख-सौभाग्य की कामना की। जगह-जगह भीड़ उमड़ने से मेले जैसा नजारा रहा।
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पुत्र की प्राप्ति एवं उनके दीर्घायु के लिए जीवित्पुत्रिका का कठिन व्रत महिलाएं रहती हैं। निर्जला व्रत रख कर महिलाएं सुबह से ही पूजन की तैयारियों में लगी रहीं। तरह-तरह के पकवान बनाने के बाद दोपहर में पूजन सामग्री के साथ महिलाएं गंगा के किनारे, सरोवरों और अन्य सार्वजनिक स्थलों की ओर रवाना हुईं। गाजे-बाजे के साथ पहुंची महिलाओं ने विधि विधान से जिउतिया माता का पूजा की। इस दौरान माता के महात्म्य से जुड़ी कहानियां भी सुनाई गईं। महिलाओं ने प्रतीक के रूप में सोने या चांदी की जिउतिया को गले में धारण किया।
मान्यता है कि इस व्रत को रखने से पुत्र पर आने वाले संकट टल जाते हैं। ज्ञानपुर के हरिहरनाथ मंदिर के अलावा जंगीगंज, महराजगंज, बाबूसराय, चौरी, मोढ़ आदि इलाकों में महिलाओं ने आस्था के साथ जिउतिया माता का पूजन किया। गोपीगंज संवाददाता के अनुसार नगर के हनुमानगढ़ी काली देवी मंदिर पर जीवित्पुत्रिका की पूजा के लिए महिलाओं की भीड़ उमड़ी। महिलाओं ने पकवानों संग नारियल, केला, सेब, संतरा, नाशपाती, आंवला, अमरूद के साथ पूजन अर्चन किया। ढोल तासे के साथ तालाब और सरोवर के किनारे सामूहिक पूजन अर्चन कर जीवित्पुत्रिका माता की कथा सुनीं । पूजा स्थलों पर आयोजित मेेले का भी लोगों ने लुत्फ उठाया। बच्चों ने खिलौनों आदि की खरीदारी की। सुरियावां के बावन बीघा तालाब पर बड़ी संख्या में महिलाएं पूजन-अर्चन के लिए पहुंची।
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