ज्ञानपुर। जिले में शुक्रवार को भीम एकादशी का पर्व धूमधाम से मनाया गया था। भोर में स्नान आदि के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पहुंच कर मत्था टेका। इसके साथ ही 24 घंटे तक रखे गए निर्जला व्रत को तोड़ा गया।
पर्व को लेकर महिलाओं में उत्साह नजर आया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी के रूप में मनाते हैं। इस व्रत में पानी पीना वर्जित है, इसलिए इसे निर्जला एकादशी भी कहा जाता है। शुक्रवार की अल सुबह स्नान आदि के बाद आस्थावानों ने पूरे दिन प्यासा, भूखा रहकर ईश्वर की प्रार्थना की। सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु जी की कृपा पाने का प्रयत्न किया। दिन में लोगों ने ऊं नमो भगवते वासुदेवाय: का जाप करके गोदान, वस्त्र दान, छत्र, फल आदि का दान किया। हिन्दू धर्म के अनुसार साल भर में 24 एकादशी पड़ती है। भीम एकादशी के दिन व्रत रहकर भगवान की आराधना करने का फल 24 एकादशियों के बराबर होता है।