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बढ़े तापमान में झुलस गए गेहूं किसानों के अरमान

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अबकी बार बढ़े तापमान के कारण किसानों के अरमान झुलस गए। कड़ी मेहनत से तैयार गेहूं की फसल के पैदावार पर ग्रहण लग गया। तापमान में वृद्धि से गेहूं समय से पहले पक गया और दाना भी पूरी तरह से विकसित नहीं हो गया। इसके चलते प्रति हेक्टेयर पांच से आठ क्विंटल तक उत्पादन घट गया है।
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जिले में करीब 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की खेती होती है। गरीब परिवारों की साल भर की गृहस्थी गेहूं की फसल पर निर्भर रहती है। इस बार गेहूं बुआई के समय से मौसम ने किसानों का खूब साथ दिया। समय से बुआई की और फसल तैयार होने के करीब आई तो मौसम का मिजाज एकाएक बदल गया। मार्च से ही तापमान काफी बढ़ गया था। अप्रैल शुरू होते ही तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। दिन भर तेज धूप ने लोगों को मई, जून का एहसास करा दिया। अचानक बढ़े तापमान से गेहूं के खेतों की नमी खत्म हो गई और समय से पहले फसल पक गई। जिसका किसानों को डर था, हुआ भी वही। दाना कमजोर होने के कारण उत्पादन प्रभावित हो गया। किसानों ने गेहूं की मड़ाई कराई तो यह तथ्य सामने आया कि औसत से कम उत्पादन हो रहा है। शुरूआती मौसम देखकर किसानों को लगा था कि 40 से 45 हेक्टेयर प्रति क्विंटल पैदावार होगी। वर्ष 2021 में 38 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार हुई थी, जबकि अबकी बार प्रति हेक्टेयर 30 से 32 क्विंटल उपज का औसत आ रहा है। कृषि विभाग ने उम्मीद जताई थी कि डेढ़ लाख एमटी गेहूं की पैदावार होगी, लेकिन एक से सवा लाख एमटी ही पैदावार हुई।
उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने बताया कि अनुमान पर तापमान भारी पड़ा है। इस साल गेहूं की पैदावार बढ़ने की उम्मीद किसानों एवं विभाग को थी। गेहूं के लिए होली के आसपास तक मौसम सही था, लेकिन उसके बाद तापमान बढ़ने से पैदावार प्रभावित हो गया।
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