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बजट में बुनकरों के लिए कोई घोषणा नहीं

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भदोही। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन का बजट भले ही अर्थव्यवस्था को गति देने वाला हो, लेकिन कालीन उद्योग के बुनकरों, उद्यमियों, मजदूरों के लिए इसमें कुछ नहीं है। वित्त मंत्री के ढांचागत विकास, सात बंदरगागों के निर्माण, राष्ट्रीय रेल योजना-2030 की घोषणा में भले ही बाद में कुछ हिस्सा भदोही कालीन उद्योग को भी मिल जाए, लेकिन यदि उद्यमियों और बुनकरों को फौरी तौर पर कोई राहत नहीं मिली है। आल इंडिया कारपेट मैनुफेक्चरर्स एसोसिएशन (एकमा) के पूर्व अध्यक्ष रवि पाटोदिया का कहना है कि हैंडीक्राफ्ट्स उद्योग के लिए अलग से श्रम कानून होने चाहिए। उद्यमियों के लिए चलाई जा रहीं योजनाओं का क्रियान्वयन रुकना नहीं चाहिए लेकिन बजट में इन बातों पर गौर नहीं किया गया।
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पूर्व एकमा अध्यक्ष ने कहा कोरोना काल में हैंडीक्राफ्ट उद्योग को फौरी सहायता की दरकार थी। हमें एमईआईएस योजना में निर्यात के एफओबी वैल्यू का पांच प्रतिशत सहायता मिलती थी, जिसे 31 जनवरी को खत्म कर नई रोडटेप योजना में परिवर्तित कर दिया गया। जबकि नई योजना अभी चालू नहीं हो सकी है। इससे वर्तमान में योजना का लाभ नहीं मिल रहा है और एक अप्रैल से 31 दिसंबर 2020 तक सहायता राशि एमईआईएस में फंस गई है। कहा कोई भी श्रम कानून हो, उससे हैंडीक्राफ्ट्स सेक्टर को बाहर रखा जाना चाहिए। क्योंकि आज श्रमिकों को काम चाहिए, जो उन्हें नहीं मिल पा रहा है। बजट में श्रमिकों का पलायन रोकने के उपाय होने चाहिए थे, जिस पर गौर नहीं किया गया। बजट से श्रमिकों को भी निराशा हाथ लगी है।
नईबाजार के हैंडटफ्टेड बुनकर तौहीद अंसारी ने कहा कि हम लोग बजट नहीं समझते। अगर 365 दिन काम मिले तो लगता है कि बजट अच्छा है। कोरोना महामारी के बाद से दूसरों के आसरे रहना पड़ रहा है। प्रतिदिन काम नहीं मिल रहा है। अमरोहा के हैंडलूम बुनकर नजम बताते हैं कि घर छोड़ कर यहां काम कर रहे हैं तो बचत भी तो होनी चाहिए, जो वर्तमान में मुश्किल हो गया है। कहा कि महंगाई कहां से कहां पहुंच गई और आगे कहां तक जाएगी, इस पर गौर करने का समय आ गया है। बजट तो आता जाता रहता है।
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