बरसात से खराब हो रही कौलापुर में सरसों की फसल।
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ज्ञानपुर। कालीन नगरी में शुक्रवार को मौसम ने फिर अपना मिजाज बदला। सुबह ही रिमझिम बारिश शुरू हो गई। तकरीबन आधे घंटे की बारिश और फुहारों के बाद दोपहर तक आसमान में बादलों की जबर्दस्त घेरेबंदी बनी रही। इसके बाद छिटपुट बादलों के बीच सूर्यदेव लुकाछिपी करने लगे। इस दौरान 16 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलीं हवाओं ने सर्दी बढ़ा दी। दूसरी ओर बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी।
शुक्रवार को सुबह हुई तो आसमान में बादलों की घनी घेरेबंदी थी। सर्द हवाओं संग घिरी काली घटाओं के बीच लगभग सवा छह बजे फुहारें शुरू हो गईं। पांच से 10 मिनट की बूंदाबांदी के बाद गरज-चमक के साथ रिमझिम बारिश होने लगी। इससे निचले इलाके की सड़कें गीली हो गईं और कच्ची सड़कों पर कीचड़ ही कीचड़ फैल गया। सबसे ज्यादा चिंता दलहन और तिलहन की खेती करने वाले किसानों की बढ़ गई। उनका कहना है कि रुक-रुक कर पिछले कई दिनों से हो रही बारिश के कारण सरसों और चना-मटर की फसल प्रभावित हो गई है। पिछले दिनों ओलावृष्टि होने से सरसों के फूल झड़ गए थे। साथ ही फसल नुकसान भी हुई थी। हवाओं के चलते लगभग तैयार हो चुकी गेहूं की फसल गिर गई थी।
शुक्रवार को हुई रिमझिम बारिश के कारण फिर तिलहन की फसल भीग गई। इससे किसानों को भारी मुश्किलों का सामना पड़ा। किसान देर रात बारिश की संभावना से इनकार नहीं कर रहे थे। ज्ञानपुर क्षेत्र के राजेंद्र दुबे ने कहा कि बार-बार बारिश होने से फसल को सुरक्षित कर पाना कठिन हो गया है।
थोड़ा मौका मिलता तो किसान अपनी उपज को सहेज लेते। किसान राजदेव यादव ने कहा कि उनकी सरसों की फसल खराब हो चुकी है। इसी तरह अन्य किसानों की फसल भी प्रभावित हुई है। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के वैज्ञानिक डॉ. एके चतुर्वेदी ने कहा कि इस बारिश से ज्यादा नुकसान नहीं होगा। मगर, बार-बार बारिश से फसल भीगने के कारण किसानों को उपज सहेजने में समय लग सकता है। अगर ओले गिरेंगे तो परेशानी बढ़ सकती है। क्योंकि ऐसे मौसम में ओले गिरने की आशंका ज्यादा रहती है।