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अधर में वी-रैंप योजना, जर्जर खंभे-तार बढ़ाएंगे मुश्किल

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जिले में विद्युत विभाग की वी-रैंप योजना अधर में लटक गई है। करीब 20 करोड़ के प्रस्ताव को अभी तक मंजूरी नहीं मिल सकी है। इसके चलते ग्रामीण अंचलों में जर्जर और लटक रहे तार और खंभों को बदलने की योजना लटक गई है। उधर, अप्रैल की किसान गर्मी में शॉर्ट सर्किट से फसल जलन की आशंका से चिंतित हैं।
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जिले में 25 से अधिक उपकेंद्र और 100 से अधिक फीडर हैं। जिनसे एक लाख 55 हजार उपभोक्ता जुड़े हैं। एक से डेढ़ दशक पूर्व ग्रामीण अंचलों में खींचे गए तार जर्जर हो चुके हैं। हर साल मार्च-अप्रैल में तार के शॉर्ट सर्किट से गेहूं की कई बीघे फसल जलकर नष्ट हो जाती है। किसानों की समस्याओं को देखते हुए विद्युत निगम की तरफ से वी-रैंप योजना में 20 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था। जिसमें जर्जर तार और खंभों को बदलने की योजना थी। प्रस्ताव भेजे कई दिन बीत गए, लेकिन अभी तक उसे मंजूरी नहीं मिल सकी है।
दरवांसी के किसान अरुण सिंह, गोधना के पंडा यादव, सोनपुर कटरा के लालू यादव आदि ने बताया कि विद्युत निगम की उदासीनता के कारण हर साल किसानों को काफी नुकसान होता है। संविदा पर कार्यरत लाइनमैन की रिपोर्ट पर जर्जर उपकरणों को बदलने की योजना कागजों तक सीमित है। लगभग आठ किलोमीटर क्षेत्र में एक दशक पूर्व से दौड़े तारों की हालत यह है कि एक फीडर की हाईटेंशन लाइन में पांच-छह जोड़ मिलेंगे। यही स्थिति सीमेंट और लोहे के खंभों की है। रिपेयर ट्रांसफार्मर अक्सर जवाब दे जाते हैं।
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उधर, विद्युत निगम के अधिशासी अभियंता अमर सिंह का कहना है कि जर्जर उपकरण बदलने के लिए 20 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव को अभी स्वीकृति नहीं मिली है। जिले में 10 लाख रुपये तक के वैकल्पिक उपकरण की व्यवस्था हुई है। अप्रैल के अंत तक वी-रैंप योजना शुरू होने की उम्मीद है।
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