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पंचायत भवन में चल रहा यूनानी अस्पताल

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वैश्विक महामारी के तीसरे चरण में भी यूनानी अस्पताल को जमीन न मिलने से चिकित्सक, फॉर्मासिस्ट एक जर्जर पंचायत भवन में मरीजों का इलाज करने को विवश हैं। मरीज भी यहां जाने में डरते हैं।
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मरीज नूरे इस्लाम, विनोद, रानी देवी, आयशा बेगम ने बताया कि महामारी में जिस तरह आयुर्वेद पर लोगों का विश्वास बढ़ा है, उसी तरह यूनानी अस्पताल में भी दवाओं के लिए लोग पहुंचते हैं। एलोपैथ के नाम पर सीएचसी, पीएचसी, जिला और सौ शैय्या वाले अस्पतालों को तो महत्व दिया जा रहा है, लेकिन यूनानी और आयुर्वेद से जुड़े अस्पतालों के प्रति उदासीनता बरती जा रही है। लगभग पांच से छह जिलों का एक साथ प्रभार लेकर 70 किलोमीटर वाराणसी से इन अस्पतालों की निगरानी करने वाले 30 वर्ष से अस्पताल के लिए जमीन की तलाश कर रहे हैं। मरीज सरोजनी देवी का कहना है कि वह बुखार, खांसी, दर्द का इलाज लगभग छह माह से कर रही हैं। यहां मिलने वाली यूनानी दवाओं से काफी फायदा भी है। फैजुद्दीन ने भी अस्पताल को लेकर सवाल उठाया। डा.शाइस्ता यास्मीन ने बताया कि पंचायत भवन में न बिजली है और न पानी। पूरे साल धूल और मिट्टी के बीच बैठकर मरीजों को दवाएं दी जा रही हैं। बारिश में छत टपकती है जबकि गर्मी में बैठना मुश्किल हो जाता है। क्षेत्रीय अधिकारी वाराणसी यूनानी डा.नियाज अहमद का कहना है कि सुसज्जित अस्पताल के लिए जमीन की मांग भदोही जिला प्रशासन की जा चुकी है। जब तक जमीन नहीं मिलेगी, तब तक निदेशालय बजट का आवंटन नहीं कर सकता है।
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