जिले का टीबी अस्पताल शुक्रवार से खुद के भवन में संचालित होने लगा। बीते एक दशक से जिला अस्पताल में संचालित हो रहे टीबी अस्पताल के कारण मरीजों को डिजीटल एक्स-रे के लिए करीब चार किमी दूर सौ शय्या जाना पड़ता था। अब सौ शय्या अस्पताल परिसर स्थित खुद के भवन में संचालित होने से मरीजों को आठ किमी का अतिरिक्त चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।
हालांकि जिला अस्पताल के टीबी अस्पताल को विंग बनाया गया है। यहां सिर्फ जांच की जाएगी। जिले में 2866 टीबी मरीज है। इन टीबी मरीजों का उपचार जिला अस्पताल स्थित भवन में होता था। जिले में सौ अस्पताल की नींव 2008 में पड़ी थी। 2014 में यहां टीबी अस्पताल बनकर तैयार हुआ था।
ड्रग वेयर हाउस न होने के कारण 2016 से इसे दवा का गोदाम बनाया गया था। 2025 में ड्रग वेयर हाउस बनकर तैयार हुआ। कार्यदायी संस्था ने जनवरी में इसे स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर किया।
जिसके बाद खाली हुए टीबी अस्पताल के भवन में मरीजों का उपचार भी चालू कर दिया गया है। अब मरीजों को उपचार के साथ-साथ उन्हें एक्स-रे के लिए करीब आठ किमी का अतिरिक्त चक्कर नहीं लगाया पड़ेगा।