जिला अस्पताल की इमरजेंसी में इन दिनों प्रशिक्षुओं का कब्जा है। तीन महीने की ट्रेनिंग पर आए करीब 15 प्रशिक्षु ट्रेनिंग पूरा होने के बाद भी अस्पताल में जमे हुए हैं। स्थिति यह है कि कई बार ये मरीजों के साथ ही बदसलूकी करते हैं। वहीं इनके माध्यम से अस्पताल में कमीशन का खेल भी चल रहा है। जिम्मेदार इसको लेकर अनभिज्ञ बने हुए हैं।
जिला अस्पताल में लगातार निजी नर्सिंग होम, स्कूल से छात्र-छात्राएं तीन महीने के लिए ट्रेनिंग पर आते हैं। ट्रेनिंग पूरा होने पर उन्हें प्रमाण पत्र दिए जाते हैं। जिसके बाद वे अलग-अलग अस्पतालों, निजी नर्सिंग होम के साथ अन्य सेंटरों पर अपनी सेवाएं देते हैं। अस्पताल में छह महीने पहले करीब 25 डी फार्मा के छात्र प्रशिक्षण लेने आए थे।
अस्पताल में प्रशिक्षण का समय तीन महीने का होता है। तीन महीने का प्रशिक्षण लेने के बाद करीब 10 प्रशिक्षु तो वापस चले गए, लेकिन 15 अस्पताल छोड़ने का नाम नहीं ले रहे हैं। बताया जा रहा है कि अस्पताल की इमरजेंसी में जमे यह प्रशिक्षु कई बार मरीजों के साथ बदसलूकी भी करते हैं।
अस्पताल में रोजाना 800 से 900 मरीजों की ओपीडी होती है। ओपीडी में आने वाले मरीजों को चिकित्सक दवाएं लिखते हैं, लेकिन प्रशिक्षु से बिचौलियों का रूप ले चुके ये छात्र कमीशन के खेल में जुट गए हैं। कई बार इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीजों के तीमारदारों और मरीजों के साथ बदसलूकी भी करते हैं।
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तो कमीशन के खेल में लगे हैं प्रशिक्षु
शासन का सख्त आदेश है कि मरीजों को अस्पताल के अंदर की दवा लिखी जाए या जन औषधि केंद्र की दवा पर्ची पर लिखी जाए। बताया जाता है कि अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों को डॉक्टर जब दवा लिख देते हैं, प्रशिक्षु से बिचौलिए बने ये लोग कमीशन के खेल में उन्हें अपने मेडिकल स्टोर पर लेकर जाते हैं।
केस वन : अस्पताल की इमरजेंसी में बुधवार को पहुंचे भुड़की गांव युवक के साथ इमरजेंसी में तैनात एक प्रशिक्षु द्वारा बदसुलुकी करते हुए उनका मोबाइल छिन लिया गया।
केस टू : ज्ञानपुर निवासी सुजीत दुबे अपनी बेटी को दिखाने अस्पताल पहुंचे थे। ओपीडी में तैनात इन्हीं बिचौलिए उनके साथ जुट गए। मना करने पर वे उनसे उलझने को तैयार हो गए।
इस समय जिला अस्पताल में 10 प्रशिक्षुओं की नई बैच आई है। अन्य को प्रमाण पत्र देकर लौटा दिया गया है। उसके बाद भी अगर अस्पताल में कुछ लोग सक्रिय हैं तो अब इसकी जांच कराई जाएगी। मरीजों के पास ऐसे लोग जाते हैं तो इसकी शिकायत दर्ज कराएं। - डॉ. अजय तिवारी, सीएमएस जिला अस्पताल।