ज्ञानपुर (भदोही)। सुनने में थोड़ा अटपटी लगेगा, लेकिन बात है सोलह आने सच। गरीबों का हक लखपति और करोड़पति हजम कर रहे हैं। डीघ ब्लॉक के गांवों में लग्जरी कार और तीन मंजिला मकान वालों का अंत्योदय कार्ड बनाया गया है। सदाशिवपट्टी गांव में मामला सामने आने के बाद डीएम ने फाइल तलब कर ली है। प्रकरण में सत्यापन अधिकारी पर मुकदमा दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।
सरकार की ओर से राशन वितरण से लेकर अन्य कई योजनाओं का लाभ देने के लिए अंत्योदय कार्ड के आधार पर लाभार्थी तय करती है। जिले में सरकारी योजनाओं का लाभ जिसको मिलना चाहिए, उसे नहीं मिल रहा है। ऐसे-ऐसे लोगों को अंत्योदय कार्ड बना दिया गया है, जो उसके पात्र ही नहीं है, जिनके पास गाड़ी, पक्का मकान और ठीकठाक खेतीबारी है। व्यवस्था की इस खामी पर लोग अचरज में हैं। एक सप्ताह पूर्व डीघ के सदाशिवपट्टी गांव के एक ग्रामीण ने डीएम को फोन कर अंत्योदय कार्ड बनवाने की शिकायत की। डीएम के निर्देश पर सीडीओ विवेक त्रिपाठी ने बीडीओ को भेजकर सत्यापन कराया। जांच में मामला सही मिलने पर गांव के सभी अंत्योदय कार्ड की फाइल तलब की गई। सदाशिवपट्टी इकलौता गांव नहीं है, जहां ऐसी गड़बड़ी हुई है। जमुनीपुर अठगवां, करियांव, कौलापुर, बिहराहिमपुर समेत हर गांव में सात से 10 लोग ऐसे हैं, जो लाखों के मालिक हैं लेकिन गरीब बनकर बैठे हैं। मुख्य विकास अधिकारी विवेक त्रिपाठी ने कहा कि 2017 में जिस सत्यापन अधिकारी ने उस व्यक्ति का कार्ड बनाया है उसके खिलाफ एफआईआर का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के बाद अंत्योदय कार्ड का सिरे से सत्यापन होगा।
कोटे से लिया राशन और बेच दिया
ज्ञानपुर। गलत ढंग से गरीबों का हक मारने वाले अंत्योदय कार्ड धारक कोटे की दुकानों से राशन लेने के बाद उसे बाजार में बेच देते हैं। गोपीगंज से सटे गांव के एक कार्डधारक ने सोमवार को कोटे की दुकान से नि:शुल्क अतिरिक्त चावल लिया और उसे दुकान पर आकर बेच दिया।