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तीस हजार की आबादी, एक पार्क की सुविधा भी मयस्सर नहीं

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जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी की दूरी, 30 हजार की आबादी, लोगों को नगर क्षेत्र में होने का गौरव तो मिला है, लेकिन सुविधाएं यहां गांव की तरह ही हैं। कहने को तो घोसिया नगर पंचायत के लोग शहरी हैं, जो नहीं जानता उसे यही लगता होगा कि नगर है तो पार्क की सुविधा होगी, बच्चे सुबह-शाम खेलते होंगे। बुजुर्गों को टहलने के लिए मुकम्मल इंतजाम होगा, लेकिन ऐसा है नहीं। जब से नगर पंचायत का गठन हुआ है, तब से लोग एक अदद पार्क के लिए तरस रहे हैं। नगर के रहवासियों ने कई बार इसके लिए प्रयास किया, लेकिन निरर्थक ही रहा। पार्क के अभाव में न तो लोग दो वक्त चैन से कहीं बैठकर बात कर पाते हैं और न ही सुबह खुली हवा में घूम पाते हैं। बच्चों के खेलने के लिए गांव की तरह गलियां या फिर छत ही हैं। जानकार लोगों की मानें तो जिसे नगर क्षेत्र का दर्जा दिया जाता है, वहां सभी तरह की सुविधाएं होती हैं। नगर की आबादी घनी होती है, इसलिए एक पार्क तो होना ही चाहिए। नगर के बच्चे आखिर कहां खेलने जाएंगे। उन्हें कुछ देर टहलना होगा तो कहां जाएंगे। बुजुर्गों को सुबह-शाम वॉक करना होगा तो कहां जाएंगे। ये सभी काम करने के लिए पार्क का होना आवश्यक है। अब तक नगर क्षेत्र में कहीं भी पार्क का न होना यहां के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों दोनों की सुस्ती को प्रदर्शित करता है।
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पार्क के लिए 12 विस्वा जमीन हुई है चिह्नित
नगर पंचायत घोसिया कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक पार्क बनाने के लिए जमीन चिह्नित की गई है। जहां 12 विस्वा जमीन पर आने वाले दिनों में पार्क बन सकता है। हालांकि अभी तक इसमें पार्क बनाने के लिए प्रशासन का किसी तरह का दिशा र्निदेश नहीं मिला है। पंचायत अपने स्तर से काम कर चुुका है, जमीन चिह्नित कर पत्रक भेज चुका है। इस मामले में घोसिया ईओ महेंद्र कुमार ने बताया कि ग्राम पंचायत क्षेत्र में कहीं पार्क नहीं है। पार्क बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। उच्चाधिकारियों का आगे जो भी निर्देश आएगा, उसके अनुसार काम किया जाएगा।
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