भदोही रेलवे स्टेशन पर नही लगा कोच इंडिकेटर। संवाद
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ज्ञानपुर। बेहतर यात्री सुविधाओं देने का दावा करने वाले रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। भदोही और गोपीगंज रेलवे स्टेशन पर कोच इंडीकेटर नहीं है। इस कारण कई यात्रियों को रोज ट्रेन छूट जाती है। शौचालयों की स्थिति बदहाल है। सुरियावां स्टेशन पर बैठने के इंतजाम नहीं है। भदोही और सरायकंसराय स्टेशन पर शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। जिले में ज्ञानपुर रोड, भदोही, माधोसिंह, सुरियावां, परसीपुर, सरायकंसराय प्रमुख स्टेशन हैं। हर दिन ज्ञानपुर रोड व भदोही में 12 से 15 ट्रेनों का ठहराव होता है। अलग-अलग स्टेशनों से औसतन करीब 20 हजार लोग हर दिन यात्रा करते हैं।
सीन एक -
भदोही रेलवे स्टेशन : यह जिले का प्रमुख रेलवे स्टेशन है। शाम होते ही स्टेशन पर अंधेरा छा जाता है। रात में यात्री कोच इंटीकेटर नहीं होने से परेशान होते हैं। यहां से हर दिन सात से आठ हजार लोग यात्रा करते हैं। आरक्षण काउंटर भी बंद है।
सीन दो -
ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन : यहां सामुदायिक शौचालय के दरवाजे गायब हैं। शौचालय में गंदगी है। सबसे अधिक समस्या महिला यात्रियों को होती है।
सीन तीन :
सुरियावां रेलवे स्टेशन : यहां पेयजल की व्यवस्था नहीं है। प्लेटफार्म पर दो हैंडपंप है। एक साल भर खराब है। प्लेटफार्म नंबर दो विस्तारीकरण में ऊंचा कर दिया गया है। दिव्यांग और महिला यात्रियों को परेशानी होती है।
सीन चार : परसीपुर रेलवे स्टेशन : स्टेशन पर दो हैंडपंप हैं। दोनों खराब है। यात्रियों के बैठने के लिए बने बेंच टूट गए हैं। आरक्षण केंद्र और सामुदायिक शौचालय बंद है। यहां हर दिन 800 यात्री यात्रा करते हैं।
यात्रियों की पीड़ा
स्टेशन पर बाथरूम की तरफ गया तो वहां देखते ही ऊल्टी आने लगी। स्टेशन के शौचालय में इस तरह की गंदगी देखकर मन खराब हो गया। सफाई पर इतने पैसे खर्च करने के बाद भी यह हाल है। - अनुराग कुमार, यात्री।
व्यापारिक काम से अक्सर वाराणसी व प्रयागराज जाना होता है। स्टेशन का हाल यह है कि यहां न तो बैठने के इंतजाम है और न ही रुकने के। प्लेटफार्म भी ऊंचा कर दिया गया है। - नितेश भोजवाल, यात्री।
मेरा वाराणसी आने जाने का एमएसटी है। पूरे ठंड में मैं ट्रेन से आवागमन किया हूं। ट्रेनों की लेटलतीफी से दिक्कत तो हुई ही है, लेकिन वर्तमान में स्टेशन की सबसे बड़ी समस्या है प्रकाश व्यवस्था की। स्टेशन पर रात को यदि आप पहुंचेंगे तो प्लेटफार्म पर अंधेरा रहता है। - फैय्याज खान, यात्री।
परसीपुर स्टेशन स्वतंत्रता संग्राम के समय का गवाह है। यहां पेयजल की व्यवस्था नहीं है। आरक्षण केंद्र बंद पड़ा है। सामुदायिक शौचालय बदहाल है। कोई सुनने वाला भी नहीं है। - कर्मराज दुबे, यात्री।
रेलवे स्टेशनों पर सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर सफाई की दिक्कत है तो इसकी जिम्मेदारी स्टेशन अधीक्षक की होती है। अन्य समस्याओं को धीरे-धीरे ठीक कराया जाएगा। - अशोक कुमार, जनसंपर्क अधिकारी।