चकिया। भगवान श्रीकृष्ण बरही, बाबा बनवारी दास और बाबा लतीफशाह के मेले के अवसर पर नगर पंचायत चकिया की ओर से कजरी महोत्सव का आयोजन बृहस्पतिवार को उपजिलाधिकारी आवास परिसर में किया गया। झमाझम बरसात के बाद भी श्रोता कजरी की विभिन्न विधाओं के सुर, लय व ताल की त्रिवेणी में गोता लगाते रहे।
महोत्सव का उद्घाटन मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित व फीता काटकर मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक कैलाश आचार्य, उपजिलाधिकारी कुंदन राज कपूर व नगर पंचायत के सभासदों ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर विधायक ने कहा कि कजरी की स्वर लहरियां ग्रामीण संस्कृति की आत्मा में रची-बसी हैं। कजरी के गीतों से मानव मन में अतिरिक्त उल्लास उमंग और उत्साह का संचार होता हैं। विषय वस्तु पर कजरी के गायक कलाकार मंगला सिंह चौहान, सानिया मंसूर, मनोहर, अवधेश सिंह, रोजन मुहम्मद इस्लाम, परमहंस सिंह सहित नामचीन कजरी कलाकरों ने कजरी गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं का मन मोह लिया। कजरी गीतों को सुनने की ललक से अभिप्रेरित सैकड़ों श्रोता दोपहर से देर रात तक उपजिलाधिकारी आवास परिसर में जमे रहे। इस दौरान श्रोताओं ने बनारसी कजरी, मिर्जापुरी कजरी, झूमर कजरी, ढुनमुनियां कजरी के साथ ही बिहार में गाई जाने वाली कजरी का आनंद उठाया।
महोत्सव के दौरान कलाकारों ने कजरी के विभिन्न रूपों पावसी प्राकृतिक सौन्दर्य, सावनी, घटाएं, पर्वगीत, झूलागीत, बरखागीत, संयोग-वियोग, आमोद-प्रमोद, लोक सांस्कृति, परंपराओं एवं देश गीत, समाज गीत, शौर्य गीत का आनंदमय सौन्दर्य बोध कराया। कजरी महोत्सव प्रतियोगिता में साज, आवाज, साहित्य और प्रस्तुतिकरण के आधार पर अंक निर्धारित किए गए हैं। इसमें प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार दिए जाएंगे। प्रतियोगिता के निर्णायक साहित्यकार स्वतंत्र कुमार श्रीवास्तव, हरिबंश सिंह बवाल, मुसे मुहम्मद जानी ने किया। इस मौके पर पूर्व विधायक शारदा प्रसाद, विधायक प्रतिनिधि डॉक्टर केशवमूर्ति पटेल, वृक्षबन्धु परशुराम सिंह, अभिषेक मिश्रा, राघवेंद्र प्रताप सिंह, नागेश पांडेय, अवनीश द्विवेदी, संतोष सिंह राठौर आदि मौजूद रहे। अतिथियों का स्वागत नगर पंचायत अध्यक्ष की अनुपस्थिति पर सभासदों ने किया। संचालन नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव एडवोकेट व आशुतोष मिश्रा ने किया।