जिले में बुधवार को विभिन्न स्थानों पर गुरु पूर्णिमा उत्सव मनाया गया। शिष्यों ने गुरुओं के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित आशीर्वाद लिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तिलक प्रभात शाखा की ओर से गुरु पूर्णिमा का पर्व तिलकधारी महाविद्यालय के उमानाथ सिंह स्टेडियम में मनाया गया।
स्वयंसेवकों ने भगवा ध्वज को प्रणाम कर अपनी गुरु दक्षिणा अर्पित की। इस दौरान मुख्य वक्ता आरएसएस के जिला प्रचारक अमरजीत ने कहा कि गुरु शब्द का मूल अर्थ अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का आलोक फैलाना है।
गुरु पूर्णिमा केवल एक सामान्य पूजन का दिवस नहीं, बल्कि गुरु की चेतना और आदर्शों से जुड़कर स्वयं के जीवन को रूपांतरित करने का संकल्प लेने का अवसर है। कहा कि आषाढ़ मास की पूर्णिमा को महर्षि वेद व्यास का प्राकट्य दिवस माना जाता है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कभी किसी व्यक्ति विशेष को अपना गुरु स्वीकार नहीं किया, बल्कि परम पवित्र भगवा ध्वज को ही अपना गुरु माना है। यह ध्वज हमारे पूर्वजों के त्याग, तपस्या और बलिदान का अमर साक्षी है।
भगवा ध्वज राष्ट्रीय चेतना और आत्मा का स्पंदन है। भगवा रंग उगते सूर्य की भांति भगवा रंग अंधकार को मिटाकर प्रकाश बिखेरता है। बक्शा क्षेत्र के हैदरपुर गांव स्थित देवरहा बालक बाबा आश्रम पर महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। भक्तों ने दर्शन पूजन कर आशीर्वाद लिया।
देवरहा बाबा के परम शिष्य बालक बाबा ने गुरुपूर्णिमा महोत्सव पर भक्तों के बीच कहा कि माता-पिता एवं गुरु की सेवा करना ही सच्ची भक्ति है।
उन्होंने कहा धन्य है वह देश जहां सत्संग के माध्यम से गुरुओं की आराधना की जाती है। गाय, ब्राह्मण, साधु संत एवं दीन दुखियों की सेवा निस्वार्थ भाव से करनी चाहिए। इस दौरान जफराबाद विधायक जगदीश नारायण राय, हवलदार सिंह, संतोष उपाध्याय, जशवंत सिंह बबलू, अवधराजी, प्रहलाद यादव, पम्मू सिंह, सुधाकर उपाध्याय, ओमप्रकाश सिंह, देवेन्द्र तिवारी, मौजूद रहे।
संचालन मार्कंडेय सिंह मुन्ना ने किया। मीरगंज क्षेत्र के बसेरवां गांव स्थित सद्गुरु कबीर विज्ञान आश्रम (आचार्य गद्दी बडैया) में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। अनुयायियों ने आचार्य गद्दी के प्रमुख आचार्य साधु शरण पति साहब का माल्यार्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
कबीरपंथी कलाकारों और संतों ने अपनी मधुर वाणी से कबीर साहेब की वाणियों एवं निर्गुण भजनों की प्रस्तुति दी। सत्संग एवं आशीर्वाद समारोह के उपरांत आश्रम परिसर में भंडारे का आयोजन किया गया।