ज्ञानपुर के बालीपुर में हो बोई गई सब्जी।
तवे की मानिंद तपती धरती को पसीने से सींचकर किसान हरियाली बिखेर रहे हैं। जिले में सब्जी की लहलहाती खेती किसानों को सुकून दे रही है। पिछले दिनों ओलावृष्टि के बाद घटी उपज की भरपाई किसान सब्जी की खेती के जरिए कर रहे हैं।
पिछले तीन सीजन से मौसम की मार सह रहे किसानों को खेतीबारी से काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। रबी सीजन में बारिश और ओलावृष्टि के चलते एक बार फिर नुकसान उठा चुके किसान खाली पड़े खेतों में सब्जी की खेती कर आय का स्रोत बढ़ाने के साथ ही नुकसान की भरपाई भी कर रहे हैं। गर्मी और सूरज की तपन के बीच सब्जी की खेती कर रहे किसानों को हर रोज उसकी सिंचाई करनी पड़ रही है, लेकिन सब्जी की आसमान छूती कीमतों को देखते हुए त्वरित लाभ के लिए किसान प्रचंड गर्मी में सब्जी की देखभाल कर रहे हैं। उद्यान विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो रबी और खरीफ के मध्य जायद सीजन में चार हजार हेक्टेयर रकबे में उर्द, मूंग सहित विभिन्न सब्जियों की खेती का लक्ष्य तय किया है। इसमें करीब डेढ़ हजार हेक्टेयर में सब्जी की खेती की जाएगी। हालांकि किसान सरकारी लक्ष्य से अलग हटकर सब्जी की खेती कर रहे हैं। सुंदरपुर के कृषक राम अकबाल तिवारी ने कहा कि ओलावृष्टि से हुए नुकसान की भरपाई सब्जी की खेती से की जा रही है। उन्होंने दो बीघे में सब्जी की खेती की है। बालीपुर निवासी राजाराम मौर्य ने करीब तीन बीघे रकबे में तरोई, नेनुआं, परवर सहित अन्य सब्जियों की खेती की है। उन्होंने बताया कि सब्जी की खेती कम समय में अच्छा मुनाफा देती है। जिला उद्यान अधिकारी एसएमपी पटेल ने कहा कि गर्मी में किसान कड़ी मेहनत कर सब्जी पैदा कर रहे हैं, जिसका उन्हें लाभ भी मिलेगा। कम समय में सब्जी की खेती से लाभ लेकर किसान परंपरागत फसलें भी उगा सकते हैं।