किसानों का धान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद कर उन्हें समय से भुगतान करने का दावा खोखला साबित होने लगा है। केंद्रों पर न तो ठीक से व्यवस्था है और न ही समय से धान की खरीद हो रही है। यही वजह है कि पिछले पांच दिनों से हो रही बारिश का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। कई केंद्रों पर धान भीग गया है। कुछ जगह तो इतना पानी भर गया कि केंद्र के प्रभारी ने पपिंग सेट लगाकर पानी निकलवाया। कुछ जगहों पर धान की बोरियां भीगने से उनमें जमाव होने लगा है।
सोमवार को बारिश से हुए नुकसान की पड़ताल की गई तो छनौरा राजकीय धान क्रय केंद्र की स्थिति काफी खराब मिली। यहां आलम यह है कि तीन-चार किसान धान बोरियों में भरकर केंद्र पर रखे हुए हैं। लगातार बारिश से बचाने के लिए खुद के पैसे से तिरपाल आदि का इंतजाम किया है। इसके बावजूद कुछ हिस्सा भीग गया है। आलम यह है कि गोदाम में धान रखने के लिए जगह तक नहीं है। शेरबहादुर व प्रकाश सिंह ने बताया कि चार जनवरी को ही खरीद होनी थी, लेकिन नहीं हुई। अब बारिश का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। यही हाल जंगीगंज क्रय केंद्र का भी रहा। यहां भी कई किसानों की धान भीग गई है। यहां तो जो पहले से धान रखे हैं, वे बोरी के अंदर ही अंदर जमने लगे हैं। उनमें अंकुर निकल रहा है। डिप्टी आरएमओ देवेंद्र सिंह ने बताया कि 31 केंद्रों पर 10 हजार किसानों से खरीदे जा चुके लगभग 40 हजार एमटी धान को बचाने का पूरा प्रयास हो रहा है। बेमौसम बारिश के कारण कुछ केंद्रों पर रखी बोरियां भीगी हैं। मौसम साफ होने पर किसानों की धान की खरीद शुरू करा दी जाएगी।