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Bhadohi News: पांच बांधों के फाटक खोले गए, पर्यटन स्थलों पर भी बढ़ा खतरा

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अहरौरा चकिया रोड पर स्थित गड़ई नदी पुल पर जरगो बांध का बहता पानी, संवाद
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मिर्जापुर और सोनभद्र में रुक-रुककर हो रही बारिश से जिले के 12 बांधों में पानी तेजी से बढ़ रहा है। बांधों की सुरक्षा को देखते हुए पांच बांधों अहरौरा, जरगो, अदवा, सिरसी और मेजा समेत अन्य बांधों के कहीं दो तो कहीं चार फाटक खोलकर पानी की निकासी की जा रही है। बांधों का फाटक खोले जाने से इन स्थलाें से जुड़े पर्यटन स्थलों पर भी पानी बढ़ने लगा है। खतरा बढ़ते देख सिरसी आदि जगहों पर सैलानियों की आवाजाही रोक दी गई है। साथ ही सुरक्षा के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
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मिर्जापुर और सोनभद्र को मिलाकर विंध्याचल मंडल में नगवा, धनरौल, अपर खजुरी, सिरसी, अदवा, सुखरा, घोरी, मेजा, ढेकवा, डोंगिया, अहरौरा और जरगो समेत 12 प्रमुख बांध हैं। इनमें लखनिया दरी अहरौरा बांध और विंढमफाल अपर खजुरी बांध से जुड़ा है। अपर खजुरी की पूरी जल क्षमता 548 फीट है, जबकि इस वर्ष जलस्तर 540.40 फीट पहुंच गया है। अहरौरा बांध में पूरी क्षमता 360 फीट के मुकाबले 349.19 फीट और जरगो बांध में 322 फीट के मुकाबले 318.09 फीट पानी है।
उधर, सक्तेशगढ़ क्षेत्र में धानोल नहर के उत्तरी छोर से सटे पहाड़ी इलाकों में हुई बारिश का पानी प्राकृतिक जलधाराओं से तेज बहाव के साथ बाबा सिद्धनाथ दरी पहुंच रहा है। सरसों, सेमरी, मटिहानी, बिशनपुर और इंदिरा नगर समेत आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों का पानी दरी के कुंड में गिर रहा है। कुंड से निकलने वाला पानी आगे जरगो डैम की ओर बढ़ रहा है। बारिश बढ़ी तो जलप्रवाह और तेज होने की संभावना है।
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सिरसी फाल का रास्ता बंद, जंगल से पहुंच रहे सैलानी
पटेहरा। क्षेत्र के सिरसी फाल पर जाने वाला रास्ता वन विभाग ने पूरी तरह बंद कर दिया है। बढ़ते जलस्तर और फाटक खोले जाने के कारण फाल पर जाने की मनाही है। इसके बावजूद बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में सैलानी गेट के पास वाहन खड़ी कर जंगल के रास्ते फाल तक पहुंच गए। इससे तेज बहाव के बीच हादसे की आशंका बनी हुई है। संवाद
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छह जलप्रपात बारिश में बन जाते हैं आकर्षक का केंद्र
मिर्जापुर। विंध्य की पहाड़ियों पर बारिश होते ही सूखी जलधाराओं में जान आ जाती है। चट्टानों से गिरता पानी झरनों को जीवंत कर देता है और जल प्रपातों की खूबसूरती देखते ही बनती है। मिर्जापुर वन प्रभाग में ऐसे छह प्रमुख जलप्रपात हैं, जो बारिश के मौसम में सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं। इनमें विंढमफाल, खड़ंजा फाल, टांडा फाल, सिरसी फाल, सिद्धनाथ की दरी और लखनिया दरी शामिल हैं।
मुख्य वन संरक्षक, मिर्जापुर वृत्त सुशांत शर्मा के मुताबिक मिर्जापुर वन प्रभाग में कुल छह जलप्रपात हैं। बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में पानी बढ़ने के साथ इन जल प्रपातों का प्रवाह भी तेज हो जाता है। यही वजह है कि बारिश के मौसम में इन स्थानों की खूबसूरती के साथ खतरा भी बढ़ जाता है। संवाद
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सोनभद्र वन प्रभाग में एक भी जलप्रपात नहीं
सोनभद्र वन प्रभाग में कोई जलप्रपात नहीं है। यहां नगवा और धनरौल को मिलाकर दो बांध हैं। दोनों बांध कर्मनाशा और घाघर नदियों के साथ प्राकृतिक वर्षा के पानी पर निर्भर हैं। ओबरा में ओबरा डैम, रेनूकूट में रिहंद, ओबरा वन प्रभाग में ओबरा डैम के अलावा कोई जल प्रपात नहीं है। वहीं रेनूकूट वन प्रभाग में सिर्फ रिहंद डैम है। भदोही वन प्रभाग में न तो कोई जल प्रपात है और न ही जलाशय मौजूद है।



कोट :
बांधों के फाटक खुलने और पहाड़ियों से पानी आने के कारण झरनों, दरी और जल प्रपातों के आसपास अचानक जलस्तर बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन और वन विभाग की ओर से बंद किए गए रास्तों से आगे न जाने और तेज बहाव वाले स्थानों से दूरी बनाए रखने की अपील की जा रही है। - सुशांत शर्मा, मुख्य वन संरक्षक, मिर्जापुर वृत्त।

कोट :
सिरसी बांध का गेट खोलकर पानी डिस्चार्ज करने से अभी सिरसी फॉल पर्यटकों के लिए बंद किया गया है। यदि अन्य जल प्रपातों में पानी बढ़े तो फिर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल एहतियात के तौर पर सावधानी बरती जा रही है। - राकेश कुमार, प्रभागीय वनाधिकारी, मिर्जापुर।

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बिना रबड़ सील लगाए भागे कर्मचारी, ठेकेदार को लगाई फटकार

अहरौरा बांध के निरीक्षण में मिली लापरवाही, 11 फीट खाली है जलाशय फिर भी गड़ई नदी से छोड़ा जा रहा 400 क्यूसेक पानी

संवाद न्यूज एजेंसी
अहरौरा। अहरौरा जलाशय में चल रहे मरम्मत कार्य का बृहस्पतिवार को अधीक्षण अभियंता सिंचाई कार्य मंडल एसएन शर्मा ने सिंचाई खंड चुनार के एक्सईएन हरिशंकर प्रसाद के साथ निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बांध में जलभराव की स्थिति देखने के साथ अहरौरा मेन कैनाल के सुलिस गेट का जायजा लिया। इस दौरान गेट में रबड़ सील लगाए बिना ही कर्मचारी मौके से चले गए थे। लापरवाही सामने आने पर अधीक्षण अभियंता ने संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार को कड़ी फटकार लगाई।

निरीक्षण के दौरान अधीक्षण अभियंता ने पाया कि अहरौरा जलाशय अभी करीब 11 फीट खाली है। इसके बावजूद मेन कैनाल के गेट के मरम्मत कार्य चलते गड़ई नदी के सुलिस गेट से करीब 400 क्यूसेक पानी प्रति सेकंड छोड़ा जा रहा है। सिंचाई कार्य मंडल के अधीक्षण अभियंता एसएन शर्मा ने मेन कैनाल के गेट का मरम्मत कार्य कराने का संबंधित जेई को निर्देश दिया है।
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अहरौरा बांध 11 और डोंगिया सात फीट खाली
- बारिश के मौसम के बीच सुलिस गेट की मरम्मत होने से तीन दिन से छोड़ा जा रहा पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
अहरौरा। लगातार बारिश के बावजूद अहरौरा बांध करीब 11 फीट खाली है। मेन कैनाल के सुलिस गेट की मरम्मत के बीच बारिश शुरू होने से पिछले तीन दिनों से गड़ई नदी से बांध में आ रहा पानी छोड़ा जा रहा है। बांध की क्षमता 360 फीट है, जबकि बृहस्पतिवार को जलस्तर 349.03 फीट था।
बांध के जेई ओमप्रकाश राय ने बताया कि पानी की आवक कम होने से बृहस्पतिवार को गड़ई प्रणाली से करीब 400 क्यूसेक प्रति सेकंड पानी छोड़ा जा रहा था। गेट का काम कर रहे कर्मचारी रबड़ सील लगाए बिना काम अधूरा छोड़कर चले गए, जिससे अभी दो-तीन दिन पानी रोकना संभव नहीं है। डोंगिया बांध भी सात फीट खाली है। वहां जलस्तर 541.04 फीट रहा, जबकि 548.90 फीट पर ओवरफ्लो होता है। भारतीय किसान जन मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण कुमार चौबे उर्फ मुन्ना चौबे ने कहा कि अधिकारियों की लापरवाही से बांध पूरी तरह भरे बिना ही पानी बहाया जा रहा है।
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तीसरे दिन भी बंद रहा अहरौरा-चकिया मार्ग

गड़ई नदी पुल पर एक फीट से अधिक पानी, फंसा ट्रक

अहरौरा। अहरौरा बांध से लगातार तीसरे दिन बृहस्पतिवार को पानी छोड़े जाने के कारण अहरौरा-चकिया मार्ग पर मदारपुर स्थित रेलिंग विहीन गड़ई नदी पुल पर एक फीट से अधिक पानी बहता रहा। इससे आवागमन प्रभावित रहा।

पानी के बीच राहगीर जान जोखिम में डालकर पुल पार करते नजर आए। वहीं एक ट्रक भी पुल पर फंस गया। संयोग था कि ट्रक पलटने से बच गया। रेलिंग विहीन पुल पर पानी का तेज बहाव हादसे का खतरा बढ़ा रहा है। संवाद
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जरगो जलाशय के चार गेट बंद, दो से छोड़ा जा रहा 553 क्यूसेक पानी

- पानी की आवक घटने पर लिया गया फैसला, जरगो नदी किनारे बसे लोगों ने ली राहत की सांस
संवाद न्यूज एजेंसी
अहरौरा। जरगो जलाशय में पानी की आवक कम होने पर बृहस्पतिवार की सुबह नौ बजे चार गेट बंद कर दिए गए। अब गेट संख्या 10 और 11 को छह-छह इंच खोलकर 553 क्यूसेक पानी प्रति सेकंड की गति से छोड़ा जा रहा है। बांध के जेई अजीत सिंह ने बताया कि पानी की आवक कम होने के कारण चार गेट बंद किए गए हैं। शाम चार बजे जलाशय का जलस्तर 318.01 फीट दर्ज किया गया। चार गेट बंद होने से जरगो नदी के किनारे बसे लोगों ने राहत की सांस ली है।
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