लोकसभा चुनाव में भाग्य आजमाने वाले छह प्रत्याशी नोटा से भी हार गए। भाजपा, टीएमसी, बसपा और प्रगतिशील मानव समाज पार्टी को छोड़कर सभी पांच से छह हजार मतों के आसपास ही सिमट गए, जबकि नोटा को 11 हजार 210 मत मिले। 2014 और 2019 के चुनावों में भी निर्दल एवं छोटी पार्टी के प्रत्याशियों का यही हाल रहा।
भदोही लोकसभा चुनाव में वैसे तो 25 से अधिक उम्मीदवारों ने नामांकन किया था। नामांकन पत्रों की जांच, नाम वापसी तक 10 प्रत्याशी ही चुनाव मैदान में बचे। सभी ने चुनाव भी लड़ा, लेकिन निर्दल एवं छोटी पार्टी के उम्मीदवार पूर्व की तरह पांच से छह हजार मतों तक सिमटकर रह गए। भाजपा, टीएमसी और बसपा उम्मीदवारों के मत काफी अधिक रहे, जबकि प्रमासपा के प्रेमचंद्र बिंद किसी तरह नोटा से आगे निकलने में सफल रहे।
उन्हें 13 हजार 651 वोट पाचों विधानसभा में मिले, जबकि नोटा को 11 हजार से अधिक मत मिले। सरदार पटेल सिद्धांत पार्टी के राज नारायण पटेल को 6192, राष्ट्रीय समाज पक्ष के राम प्रकाश मिश्रा को 5265, आल इंडिया फारवर्ड ब्लॉक को 5253, राष्ट्रीय उदय पार्टी के कृष्णदेव को 4587, निर्दल धीरेंद्र तिवारी को 2944, निर्दल श्यामधर तिवारी को 4841 मत मिले। जिले में लोकसभा चुनाव के लिए कुल 10 प्रत्याशी चुनाव मैदान में रहे।