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आरटीई : फीस और स्टेशनरी के लिए मिले 8.18 करोड़ रुपये

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ज्ञानपुर। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को पढ़ाने वाले स्कूलों को बच्चों के स्टेशनरी का पैसा शासन ने भेज दिया है। स्कूलों को आठ करोड़ 18 लाख 80 हजार रुपये जारी किए गए हैं। इसके बाद शिक्षा विभाग 365 निजी स्कूलों को शुल्क प्रतिपूर्ति और अभिभावकों के खाते में पैसा भेजने की कवायद में जुट गया है।
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शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत कान्वेंट स्कूलों में 25 फीसदी सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को प्रवेश दिया जाता है। यहां पढ़ने वाले बच्चों की शुल्क की प्रतिपूर्ति सरकार की ओर से की जाती है। कॉपी-किताब का पैसा अभिभावकों के खाते में भेजा जाता है। इससे गरीब बच्चों को पठन-पाठन में सुविधा मिलती है। नया शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले ही शासन ने फीस प्रतिपूर्ति के लिए प्रतिमाह 450 रुपये की दर से 11 महीने का प्रति विद्यार्थी की दर से चार करोड़ 38 लाख 15 हजार रुपये जारी किया है।
शासन ने कॉपी-किताब और यूनिफार्म पर खर्च हुए तीन करोड़ 80 लाख 65 हजार रुपये भी भेजे हैं। शिक्षा विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो 700 निजी एवं कान्वेंट विद्यालयों में 365 में आरटीई के तहत साढ़े आठ हजार बच्चे नर्सरी से लेकर आठवीं कक्षा तक पढ़ रहे हैं। शासन से धन जारी होने के बाद निजी विद्यालयों को अब राहत मिली है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शिवम पांडेय ने बताया कि गरीब एवं मध्यम परिवार के बच्चों को आरटीई के तहत निजी स्कूलों में नि:शुल्क प्रवेश दिलाया जाता है। दिसंबर में पैसा शासन से भेज दिया है। जिसे 365 विद्यालयों को भेजा जा रहा है।
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