चौरी। 640 करोड़ रुपये की लागत से वाराणसी-मछलीशहर एनएच-731 बी का निर्माण एनएचएआई कर रही है। प्रोजेक्ट का 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। हाईवे के किनारे बनी नाली लगभग 10 महीने पहले बनाई गई थी। भदोही जिले में हाईवे की दूरी 38 किलोमीटर है। भदोही से चौरी तक सात स्थानों पर नाली के चैंबर दरक गए हैं। इससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
मछलीशहर से भदोही तक सुगम यातायात के लिए एनएच-731 बी मछलीशहर-वाराणसी को जोड़ने का निर्णय लिया। नवंबर 2023 में इसका काम शुरू हुआ। मछलीशहर से जंघई, दुर्गागंज, मोढ़, भदोही और चौरी तक हाईवे का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। कुछ स्थानों पर नाली निर्माण, रेलवे ओवरब्रिज को छोड़ दिया जाए तो लगभग 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। कार्यदायी संस्था एनएचएआई की उदासीनता कही जाए या ठेकेदारों की मनमानी, हाईवे के किनारे बनी नाली सिर्फ दस महीने में ही खराब होने लगी है। सबसे खराब हालत भदोही से चौरी तक की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी हाईवे की बनी नहीं कि टूटनी भी शुरू हो गई है। चौरी में ब्रह्माश्रम, रोटहां, चौरी बाजार और कंधिया के पास नाली ध्वस्त हो चुकी है।
मोढ़, कस्तूरीपुर और दुर्गागंज में अधूरी हैं नालियां
वाराणसी-मछलीशहर हाईवे निर्माण में मोढ़, कस्तूरीपुर, दुर्गागंज बाजार में कई स्थानों पर नालियां अधूरी ही छोड़ दी गई हैं। इससे राहगीरों और दुकानदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। शिकायत के बाद भी ध्यान नहीं देने पर लोगों में नाराजगी है। सबसे अधिक दिक्कत व्यापारियों को हो रही है।
- हाईवे निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं दिया गया है। समय से पहले ही वह खराब होने लगी है। अभी यह हाल है तो कुछ सालों में यह और खराब होगा। - कर्मराज दूबे, नागरिक
- चौरी बाजार में नाली निर्माण के समय ही एनएचएआई ने गुणवत्ता में कमी कर दी। इस कारण 10 महीने में ही वह टूटने लगी है। - यासार आराफात, निर्यातक
- हाईवे निर्माण की गुणवत्ता की जांच करानी चाहिए। केंद्र सरकार की परियोजना में कार्यदायी संस्था की ओर से कराया गया घटिया है। - आशीष दूबे, व्यापारी
वाराणसी-मछलीशहर हाईवे का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। भदोही क्षेत्र में काम करने वाली फर्म का काम विलंबित है। इसके लिए नोटिस जारी किया गया है। नाली टूटने का मामला संज्ञान में नहीं है। निरीक्षण करेंगे, यदि नाली टूटी मिली तो इसकी जांच कराएंगे। इसके बाद कार्रवाई करेंगे। - मृत्युंजय यादव, एक्सईएन एनएचएआई भदोही खंड