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रोजा जिंदगी के साथ संवारता है आखिरत भी

Wed, 01 Jul 2015 02:11 AM IST
ब्यूरो, भदोही, अमर उजाला
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 11वीं रमजान को दुर्गागंज रोड मुल्ली बेगम कटरा स्थित इब्राहिमिया हलीमियां मस्जिद में तरावीह मुकम्मल हो गई।
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रमजान का चांद नजर आने के बाद से कुरआन पाक सुना रहे हाफिज-ए-कुरआन मुहम्मद रहमतुल्लाह ने 12वें दिन तरावीह मुकम्मल किया।

तरावीह मुकम्मल होने के बाद हाफिज ने रोजेदारों के हक में दुआएं की। इसके बाद रोजेदारों ने उन्हें माला फूल पहनाकर खैर मकदम किया।

उन्होंने तरावीह सुनने और सुनाने के फजीलत सुनाए और मुकम्मल होने के बाद भी रोजेदारों को रमजान माह तक तरावीह सुनने के लिए हिदायत दी।


मस्जिद के पेश इमाम मौलवी अब्दुल हय्यूल ने माह-ए-रमजान की फजीलतें बताई। कहा कि यह प्यारा और मुबारक माह रोजेदारों की जिंदगी के साथ-साथ आखिरत भी संवार देता है।

इस माह में इबादत करने से सवाब की तादाद बढ़ती ही जाती है। उन्होंने बताया कि तरावीह सुनना रसूले पाक की सुन्नत है। इस माह में शैतान को कैद कर दिया जाता है।
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 इस मौके पर शकील खां दादा, उस्मान भाई, मुहम्मद वाहिद अंसारी, मुहम्मद इस्लाम, अनवर कुरैशी, मुस्तफा कुरैशी, अब्बुल कुरैशी, अब्दुल रहमान, मुन्ना भाई, बिल्लू मास्टर, मुहम्मद हारन आदि रहे।
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