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रिमझिम बरसात से किसान सकते में 

Sun, 27 Mar 2016 06:41 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला ,भदोही
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बरसात के चलते आम के टिकोरे प्रभावित हुए
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 लगभग एक हफ्ते बाद मौसम ने रविवार को एकाएक फिर मिजाज बदला। पूरे दिन आसमान में बादलों की उमड़-घुमड़ जारी रहने के बाद शाम करीब सवा चार बजे रिमझिम बरसात हो गई। मौसम का यह रुख देखकर किसानों के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं। कृषि के जानकारों ने कहा कि अब बरसात तेज हुई तो सभी फसलों को नुकसान पहुंचेगा। 
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तकरीबन सप्ताहभर पूर्व जिले में हुई भारी ओलावृष्टि ने किसानों को झकझोर कर रख दिया था। इसमें 30 फीसदी से अधिक उपज घटने का अनुमान लगाया गया। गेहूं की तैयार फसलें जमीन पर बिछ गईं और अरहर, सरसों समेत दलहनी और तिलहनी फसलों को भारी क्षति हुई थी। प्रकृति की इस मार से किसान अभी उबर भी नहीं पाए थे कि रविवार को मौसम फिर बदली वाला हो गया। सुबह से ही आसमान में बादलों की धमक हो गई। पूरे दिन सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। दोपहर बाद लगभग सवा चार बजे रिमझिम बरसात भी शुरू हो गई। मौसम को देखते हुए आने वाले कुछ घंटों के दौरान तेज आंधी-तूफान की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा था। इससे किसान बदहवास हो गए। उनका कहना था कि गेहूं, अरहर, चना और सरसों समेत रबी की लगभग सभी फसलें तैयार हो चुकी हैं। उपज को संरक्षित करने के लिए दो-चार दिनों तक खुले मौसम की जरूरत है। बरसात हुई तो लेने के देने पड़ जाएंगे। औराई इलाके के किसान श्यामलाल ने कहा कि उनकी चार बीघे गेहूं की फसल पहले ही बरसात और तेज हवा के झोंकों में गिर चुकी है। घड़रोजों के प्रकोप से बची अरहर को अब दैऊ का कोप घर तक पहुंचने नहीं दे रहा। सबसे बुरी हालत बैंक से कर्ज लेकर खेती करने वाली किसानों की हो गई है। कृषि विशेषज्ञ एके चतुर्वेदी ने कहा कि अब बरसात हुई तो सभी प्रकार की फसलों के लिए घातक होगी। आम की फसल पर इसका सर्वाधिक बुरा असर पड़ेगा। क्योंकि वातावरण में आर्द्रता बढ़ने पर आम के बौर के लिए खतरनाक कीड़ों की सक्रियता बढ़ जाती है। 

इनसेट 
खेती-किसानी के लिहाज से यह मौसम नुकसानदेय है। अगर बरसात तेज हुई तो हालात और बिगड़ सकते हैं। सभी फसलें तैयार हो चुकी हैं। इस समय की बारिश की कोई जरूरत नहीं है। बरसात किसानों की मेहनत पर पानी फेर सकती है। 
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डॉ. आरके मौर्य
उप निदेशक कृषि 

इनसेट 
जिले में की गई रबी की खेती का रकबा 
गेहूं         44000 हेक्टेयर 
तिलहन      750 हेक्टेयर 
चना         350 हेक्टेयर 
अरहर      1300 हेक्टेयर 
मटर         200 हेक्टेयर 
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आम के टिकोरों पर संकट के बादल 
ज्ञानपुर। मौसम के रुख बदलने से जिले में आम की फसल पर भी संकट आ गया है। मौसम में नरमी आम के टिकोरों को नुकसान पहुंचा सकता है। आम के किसानों का कहना है कि बदली छाए रहने से आम के बौर में लगे दानों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटाणु सक्रिय हो जाते हैं। इससे रोग का खतरा बढ़ने से उत्पादन पर असर पड़ जाता है। 
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