ज्ञानपुर। भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन सोमवार को कालीन नगरी में परंपरागत ढंग से मनाया गया। कहीं उल्लास दिखा तो कई स्थानों पर बेहद सादगीपूर्ण माहौल में लोगों ने राखी की खुशियां साझा की। इस दौरान भाइयों ने बहना के स्नेह का रक्षासूत्र अपनी कलाई पर बांधकर उसकी सुरक्षा का संकल्प लिया। फिर एक-दूसरे को राखी की बधाई दी। सोशल मीडिया पर भी पर्व की बधाइयों का दौर खूब चला।
सावन मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक इस बार सुबह साढ़े आठ बजे से देर शाम तक रक्षा सूत्र बांधने का मुहूर्त था। इसके चलते बहनों ने सुबह ही रोली-चंदन का तिलक लगाकर भाई की आरती उतारी और फिर राखी बांधकर मुंह मीठा कराया। इसके बदले भाइयों ने बहनों को उपहार दिए। उपहार मीें गहने, कपड़े और नकदी आदि दिए गए। इसके बाद बधाई देने का दौर चला। सोशल नेटवर्किंग साइट्स फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर पर भी लोगों ने एक-दूसरे को बधाई दी। घर-घर मिष्ठान और पकवान बने। रक्षाबंधन को लेकर बच्चों और युवाओं में गजब का उत्साह दिखा। बच्चे राखी बंधवाने के लिए सुबह से ही नहाने-धोने की तैयारी में जुट गए थे। दूसरी ओर इस बार रक्षाबंधन की खुशियों पर कोविड-19 वायरस का असर भी साफ देखने को मिला। अनलॉक की पाबंदियों और एहतियात के बीच ज्यादातर लोगों ने घर पर रहकर ही त्योहार की खुशियां मनाई। बाहर घूमने-फिरने से बचते नजर आए। हालांकि पार्क और पर्यटन स्थलों को अब तक आम लोगों के लिए खोला नहीं गया है। इसके चलते भी वहां सन्नाटा पसरा रहा। जिला मुख्यालय के अलावा भदोही, औराई, गोपीगंज, जंगीगंज, सीतामढ़ी, चौरी, सुरियावां, महाराजगंज, पाली, दुर्गागंज, घोसिया, खमरिया समेत जिले के तमाम प्रमुख नगरों और बाजार में रक्षाबंधन का उत्साह देखने को मिला।
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बाजार में भीड़, उड़ी सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जी
ई की जमकर खरीदारी की। इस दौरान जगह-जगह जुटे लोगों की वजह से सोशल डिस्टेंसिंग टूटती दिखी। सावन का सोमवार होने के कारण भीड़ बढ़ गई थी। मंदिरों में भी दर्शन-पूजन के लिए पहुंचने वाले लोगों की अनियंत्रित भीड़ लगी। पुलिस केवल दर्शक बनी रही। तमाम दुकानों पर भी खरीदारी के दौरान लोग असुरक्षित ढंग से एक-दूसरे से सटकर खड़े रहे। जिन नगरों और सड़कों पर पिछले कई दिनों से कोरोना काल की वजह से सन्नाटा रहता था, उन पर सोमवार को रक्षाबंधन और सावन का आखिरी सोमवार होने के कारण खूब भीड़ रही।