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भाईयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर बहनों ने लिया सुरक्षा का संकल्प

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ज्ञानपुर। ग्राम्यांचलों में भी सोमवार को रक्षाबंधन का पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। बहनों ने अपने-अपने घरों से पैदल, साइकिल और लग्जरी वाहनों से पहुंचकर भाई के हाथ में रक्षासूत्र बांधा। ग्रामीण अंचल के छोटे-बड़े बाजार हर जगह सजी मिठाई, मालाफूल, राखी समेत अन्य प्रकार की दुकानों पर खरीदारी के दौरान अनलॉक के मानकों का उल्लंघन भी होता दिखा। राजमार्ग से लेकर लिंक और संपर्क मार्गों पर अन्य दिनों की अपेक्षा वाहनों की भरमार लगी रही। जगह-जगह संचालित पेट्रोल टंकियों पर सुबह से ही तेल लेने की होड़ रहने से भीड़ की अधिकता सुरक्षा के बचाव पर सवाल छोड़ रहे थे।
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रेलवे स्टेशनों पर पसरा रहा सन्नाटा
ज्ञानपुर। एक ओर प्रदेश सरकार बहनों को नि:शुल्क यात्रा कराने के लिए रोडवेज का संचालन कराया गया वहीं पूर्वोत्तर रेलवे के विभिन्न स्टेशनों पर सन्नाटा पसरा रहा। राजमार्ग पर वाहनों की कतार लग जाने से जहां लोगों को पांच मिनट का रास्ता एक घंटे में तय करना पड़ रहा था। चर्चा रही कि सरकार की मंशा के आगे किसी की नहीं चल पाती, क्योंकि गत वर्ष पर्व के दिन ज्ञानपुर रोड, जंगीगंज, अहिमनपुर, कटका, सरायजगदीश, अतरौरा, अलमऊ हाल्टों पर ठहराव लेकर चलने वाली पैसेंजर ट्रेनें भी खचाखच आवागमन कर रेलवे का राजस्व बढ़ाने काम कर रही थी, लेकिन इस वर्ष लाकडाउन के चलते संभव नहीं हो सका।
तीन हजार रुपये किलो बिकी पिस्ता की बर्फी
ज्ञानपुर। भाई-बहन के अटूट बंधन के आगे लाकडाउन में आर्थिक तंगी का कोई असर मिठाई की दुकानों पर देखने को नहीं मिला। गोपीगंज नगर, फूलबाग, ज्ञानपुर, भदोही, मिर्जापुररोड-गोपीगंज, पड़ाव-गोपीगंज, जंगीगंज-धनतुलसी मोड़ पर संचालित दुकानों में पिस्ता बर्फी तीन हजार रुपये किलो तक बिकी। जबकि काजू बर्फी-740, काजू कलर बर्फी-900, मेवा बाइट-800, सोहन हलुआ-380 रुपये प्रति किलो बिकी। वहीं इन्हीं दुकानों पर लड्डू, छेना आदि मिठाइयों की विशेष मांग मध्यम और निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों तक सीमित रही।
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मिलावटी-नकली सामान पर नहीं लग पाई रोक
ज्ञानपुर। रक्षाबंधन पर्व की आपाधापी में दुकानदारों ने औराई बाजार, माधोसिंह, गोपीगंज, ज्ञानपुर, पाली, दानूपुर, अभोली, दुर्गागंज, सर्रोई, बभनौटी, चौरी बाजार, नईबाजार, सुरियावां नगर, सुभाषनगर, गोधना, ऊंज, कोइरौना, कटरा, धनतलसी, खमरिया नगर, लालानगर, उगापुर, कठारी आदि बाजारों में घी, तेल, सोयाबीन, खोवा, बेसन, सूजी आदि सामान के मिलावटी और नकली होने का फर्क न समझकर ग्राहकों को लूटते रहे। प्रशासन के साथ खाद्य सुरक्षा, अभिहित अधिकारियों-कर्मचारियों का दूर-दूर कोई पता नहीं रहा।
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