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सौ से अधिक विद्यालयों में नहीं पहुंचे प्रश्नपत्र

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परिषदीय परीक्षा की तैयारी के दावे मंगलवार को फेल हो गए। खंड शिक्षा अधिकारी से लेकर प्रधानाध्यापक तक अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा सके। इसके चलते पहली पाली में 100 से अधिक स्कूलों में प्रश्नपत्र नहीं पहुंचा और शिक्षकों को श्यामपट पर प्रश्न लिखकर परीक्षा करानी पड़ी। इसको लेकर स्कूलों में खलबली मची रही।
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कोरोना वायरस के कारण वर्ष 2020 और 2021 में आठवीं तक की परीक्षा नहीं हो सकी थी। अब 2022 में संक्रमण की स्थिति सामान्य होने पर परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया। परीक्षा में जिले के 892 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट विद्यालयों में पंजीकृत एक लाख 83 हजार परीक्षार्थियों को शामिल होना था, लेकिन काफी बच्चे नहीं आए। करीब एक सप्ताह से विभागीय स्तर से तैयारी की जा रही थी। इसके तहत खंड शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से प्रश्नपत्र स्कूलों तक पहुंचाने की बात कही गई थी। विभाग ने दावा किया था कि सभी स्कूलों में प्रश्नपत्र पहुंच चुका है, लेकिन मंगलवार को परीक्षा शुरू हुई तो सारे दावे फेल होते दिखे। मंगलवार को सुबह साढ़े नौ बजे से 11.30 बजे तक पहली पाली की परीक्षा हुई, जबकि दोपहर साढ़े 12 से दूसरी पाली की परीक्षा शुरू हुई। यह समस्या पहली पाली की परीक्षा में दिखी। भदोही के पिपरिस, डीघ के इटहरा समेत 100 से अधिक स्कूलों में प्रश्नपत्र नहीं पहुंचने से आपाधापी की स्थिति बनी रही। कई स्कूलों के शिक्षकों ने व्हाट्स एप पर आए प्रश्नपत्र को श्यामपट पर लिखकर किसी तरीके परीक्षा कराई। दर्जन भर से अधिक स्कूलों में परीक्षा ही नहीं कराई जा सकी। जिसको लेकर स्कूलों में खलबली मची रही। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि पहली पाली में कुछ केंद्रों पर प्रश्नपत्र नहीं पहुंच सके। इसको लेकर खंड शिक्षा अधिकारी और एनपीआरसी से जवाब तलब किया गया है। दूसरी पाली में परीक्षा सकुशल संपन्न हुई। बताया कि उन्होंने सुबह की पाली में डीघ ब्लॉक के छह से सात विद्यालयों का निरीक्षण किया। जहां प्रश्नपत्र पहुंच गए थे।
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