घोसिया(भदोही)। मुकद्दस माह-ए-रमजान की शुरुआत 25 अप्रैल से हो रही है। कोरोना वायरस की महामारी को रोकने के लिए चल रहे लॉकडाउन में न तो मस्जिदों में फर्ज और तरावीह की नमाज अता होगी न घरों में सोशल डिस्टेंस टूटेगा उल्लंघन पर मुस्लिम कौम जिम्मेदार होगी। उक्त नसीहत जमीयत उलमा के सदर मुफ्ती सुहेल अख्तर कासमी, जनरल सेक्रेटरी मौलाना तौफ़ीक़ कासमी, मो रिजवान अहमद और कमरूनिशां ने दी।
वक्ताओं ने कहा कि माह-ए-रमजान कौम के लिए बरकतों वाला महीना माना जाता है कौम को भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए लॉकडाउन का समर्थन करना चाहिए। नमाज और इबादत घरों में रहकर हो सकता है इस दौरान भी कौम को सोशल डिस्टेंस का ध्यान रख बाहरी लोगों से बचना होगा। रोजा रखते समय सहरी और इफ्तार में उचित दूरी बनाकर ही करने से महामारी को मात दिया जा सकता है। माह में होने वाले फिजूल खर्च को रोक कर ऐसे लोगों की मदद का आह्वान किया कि जो उसके वास्तविक हकदार हों। नमाज, इफ्तार के बाद बारगाहे इलाही में हाथों को उठाकर दोआख्वानी कोरोना जैसी घातक बीमारी को रोकने में कारगर होगी।