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Bhadohi News: हर दो घंटे में ट्रिप हो रही बिजली, ब्लड कंपोनेंट यूनिट में रखी मशीनें नहीं हो पा रहीं इंस्टाल

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जिला अस्पताल में लगा स्वतंत्र फीडर का ट्रांसफार्मर। संवाद - फोटो : Archive
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ज्ञानपुर। महाराजा चेतसिंह जिला अस्पताल में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए दो महीने पहले ही स्वतंत्र विद्युत फीडर स्थापित किया गया है, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते इसका संचालन अभी तक शुरू नहीं हो सका है। इसके कारण ब्लड कंपोनेंट यूनिट में रखी गई मशीनें इंस्टॉल नहीं हो रही है। कंपोनेंट यूनिट के लिए 24 घंटे बिजली की जरूरत पड़ती है। यहां हर दो घंटे में बिजली ट्रिप कर रही है।
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जिला अस्पताल में करीब एक करोड़ की लागत से ब्लड कंपोनेंट यूनिट की स्थापना की गई है। इसमें खून के साथ मरीजों को प्लाज्मा आदि भी मिल सके। करीब एक साल से अधिक समय से यहां यूनिट है। मशीनें भी आ चुकी हैं। दो महीने पहले यहां स्वतंत्र फीडर भी स्थापित किया जा चुका है। ब्लड कंपोनेंट यूनिट के संचालन के लिए 24 घंटे बिजली की आवश्यकता होगी, लेकिन जिला अस्पताल में बिजली की सप्लाई ठप होते ही अस्पताल में सारी जांच मशीनें बंद हो जाती हैं। अमूमन ऑपरेशन के दौरान कभी-कभी बिजली जाते ही डॉक्टरों के हाथ कुछ समय के लिए रुक जाते हैं। जनरेटर स्वत: 30 सेकंड में शुरू होता है। स्वतंत्र फीडर चालू होने के बाद यह समस्या दूर हो जाएगी। वहीं स्वत: जनरेटर स्टार्ट होने की व्यवस्था केवल ऑपरेशन थिएटर में है, बाकी अन्य तीन जनरेटरों को चालू करना पड़ता है। इसमें पांच से 10 मिनट का समय लगता है। जिसका कनेक्शन, इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक होता है। फीडर चालू होने के बाद अब न ही बिजली कटेगी और न ही जनरेटर के चालू होने का इंतजार होगा। अस्पतालों में 24 घंटे निर्बाध रूप से बिजली आपूर्ति की जाएगी।

98 फीसदी काम पूरा

एमसीएच में स्थापित स्वतंत्र फीडर का काम करीब 95 फीसदी पूरा हो चुका है। सब कुछ ठीक रहा तो इस महीने के अंत तक फीडर चालू हो जाएगा। जिला अस्पताल और महाराजा बलवंत सिंह राजकीय चिकित्सालय में स्वतंत्र फीडर लगाया गया है। दोनों अस्पतालों में रोजाना 1600 से अधिक ओपीडी होती है। इसके अलावा 200 से अधिक इमरजेंसी होती है। अस्पताल में रोजाना 5000 से अधिक मरीज, तीमारदारों की भीड़ होती है।
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बिजली गुल होते ही मशीन बंद

जिला अस्पताल में बिजली गुल होते यहां सभी प्रकार की जांच मशीनें बंद हो जाती हैं। क्योंकि जनरेटर से ये मशीनें लोड नहीं उठाती हैं। फीडर लगने से प्रसव कक्ष, एक्सरे मशीन, अल्ट्रासाउंड, पैथोलॉजी की मशीनें निर्बाध रूप से चल सकेंगी। करीब साल भर से यह प्रोजेक्ट पर काम शुरू है।

हाल ही चार्ज मिला है, स्वतंत्र फीडर की फाइल देखी है। जहां पर दिक्कतें हैं, उसे दूर करके इससे जल्द ही चालू कराया जाएगा। स्वास्थ्य समिति की बैठक में यह मुद्दा भी उठाऊंगा। - डॉ. धीरज प्रकाश, कार्यवाहक सीएमएस, एमसीएच।
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