स्वच्छ भारत मिशन के तहत कलेक्ट्रेट सभागार में सॉलिड एंड लिक्विड रिसोर्स मैनेजमेंट विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का मंगलवार को समापन हो गया। जिलाधिकारी आर्यका अखौरी, मुख्य विकास अधिकारी भानु प्रताप सिंह, अपर जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार मिश्र, निदेशक इण्डियन ग्रीन सर्विस सी श्रीनिवासन ने पर्यावरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों/ संस्थाओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।
पर्यावरणविद् सी श्रीनिवासन ने कहा कि ठोस और तरल संसाधन प्रबंधन एक जटिल समस्या है। कहा कि पर्यावरण प्रदूषण के कारण नगर निकाय के विभिन्न वार्डों में कचरा जमा होने की ज्वलंत समस्या को वैज्ञानिक ठोस स्थापित करके हल किया जा सकता है। सभी वार्डों में तरल संसाधन प्रबंधन (एसएलआरएम) केंद्र बनाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि उद्यान अपशिष्ट (जैसे सूखे पत्ते), मछली बाजार अपशिष्ट, सब्जी अपशिष्ट, द्वितीयक पृथक्करण शेड, एक मवेशी शेड और दो या तीन बायो-गैस संयंत्र प्राथमिक पृथक्करण स्रोत पर किया जाता है। डीएम ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण के दृष्टिगत हमें ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन की तकनीकी विधि को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इंटीग्रेटेड सॉलिड एवं लिक्विड वेस्ट रिसोर्स मैनेजमेंट प्रणाली से रिसाइक्लिग प्रक्रिया को सभी नगरीय निकाय में लागू किया जाएगा।