ज्ञानपुर। भदोही कोतवाली के नई बाजार में झोलाछाप के गलत इलाज से युवक की मौत के मामले में कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई है। सीएमओ डॉ. संतोष कुमार चक के आदेश के बाद भी सीएचसी अधीक्षक की तरफ से झोलाछाप के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं कराया गया। इसको लेकर महकमे के खिलाफ सवाल उठने लगे हैं।
भदोही के जाहिदपुर निवासी उषा देवी पत्नी स्व. रामसकल यादव ने 15 नवंबर 2024 को शिकायत किया कि शहीद नगर के झोलाछाप की लापरवाही से उसके पति की मौत हो गई। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सीएमओ ने मामले की जांच कराई। इसमें झोलाछाप रामधनी यादव ने बताया कि उनके पास कोई चिकित्सकीय योग्यता नहीं है। डिस्पेंसरी पर कुछ स्टेरॉयड दवाएं मिली जो प्रतिबंधित है। उसने बताया कि मृतक का इलाज उसने ही किया था। दवाओं के बारे में उसने स्पष्ट जवाब नहीं दिया। क्लीनिक संचालन को लेकर जो प्रमाणपत्र दिया गया वह युवक की मौत के बाद का मिला। शिकायत की जांच में सभी साक्ष्य से यह स्पष्ट हुआ कि झोलाछाप की लापरवाही से मौत हुई। उक्त प्रकरण में सीएमओ ने 24 दिसंबर 2024 को झोलाछाप के खिलाफ मेडिकल एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश अधीक्षक भदोही को दिया, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं की गई। सीएचसी अधीक्षक डॉ. समीर उपाध्याय ने कहा कि मामले की जांच के लिए टीम गठित की गई है। जांच पूर्ण होने पर केस दर्ज कराया जाएगा। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि सीएमओ के स्तर से कराई गई जांच या तो असत्य है या मामला कुछ और है। इसको लेकर तमाम सवाल उठने लगे हैं। चर्चा है कि तालमेल होने से मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।