पूर्वोत्तर और उत्तर रेलवे के जंघई-बनारस, प्रयागराज-माधोसिंह रेल खंड पर महामारी के तीसरे चरण का असर मात्र एक माह में ही दिखने लगा है। लगभग 25 फीसदी तक यात्रियों की संख्या घटने पर आरक्षण काउंटर खाली पड़े हैं तो खानपान टेंडर लेने वाले वेंडर मजदूरी तक निकाल पाने के लिए परेशान हैं। सोमवार को ज्ञानपुर रोड, माधोसिंह, भदोही, सुरियावां, परसीपुर, सरायकंसराय आदि स्टेशनों पर सन्नाटा रहा।
स्टेशनों पर इक्का-दुक्का मिले यात्रियों से जब पड़ताल करते समय महानगरों की ओर यात्रा में आई कमी का कारण पूछा गया तो यात्री रहमान अली, सुधारक, जितेंद्र ने बताया कि ठंड कितना भी हो, लेकिन जरूरत पड़ने पर यात्रा नहीं रोकी जा सकती है। वैश्विक महामारी के तीसरे चरण में ओमिक्रॉन का प्रभाव महाराष्ट्र, नई दिल्ली जैसे महानगरों में अधिक होने से इस बात का डर बना रहता है कि यदि कोई अपने रोजगार वाले स्थान पर पहुंच भी जाएगा, लेकिन वापसी की चिंता लगी रहती है। खानपान का ठेला सजाकर स्टेशनों पर खड़े अरविंद, किशोरी लाल ने बताया कि अप-डाउन में स्टापेज लेकर गंतव्य की ओर जा रही ट्रेनों में यात्रियों की संख्या में काफी कमी आई है। पूर्व के दिनों में ट्रेन रुकने पर पकौड़ी, ब्रेड मसाला, चाय, पानी, समोसा की मांग अधिक रहने से आय में भी इजाफा रहता था, जो अब नहीं। उम्मीद है कि महामारी का असर जब कम होगा, तभी आवागमन में यात्रियों की संख्या में बढ़ोत्तरी देखी जा सकती है। जनसंपर्क अधिकारी वाराणसी डिविजन अशोक कुमार ने बताया कि ठंड नहीं बल्कि महामारी को लेकर यात्रा में लगभग 25 फीसदी तक कमी देखी जा रही है।