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पंचायत चुनाव : सपा का बढ़ा जनाधार तो भाजपा का वोट प्रतिशत

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ज्ञानपुर। सूबे में 2022 के विधानसभा चुनाव से पूर्व पंचायत चुनावों के रिजल्ट ने सबसे बड़ी पार्टी भाजपा के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। कालीन नगरी की 26 जिला पंचायत सदस्य वाली सीटों में सपा का जहां जनाधार बढ़ा है वहीं भाजपा का वोट प्रतिशत। हालांकि रिजल्ट से भाजपा को तगड़ा झटका लगा है। 2015 के लिहाज से भले ही उसकी सीटें बढ़ी हैं, लेकिन बहुमत से अभी भी काफी कम है। कांग्रेस जहां एक भी सीट नहीं निकाल सकी वहीं बसपा की हालत भी ठीक नहीं है। विजयी उम्मीदवार आने वाले विधानसभा चुनावों के समीकरण पर असर डालेंगे।
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अपनी मखमली कालीनों व मनमोहक हस्तकला के लिए विश्वविख्यात कालीन नगरी भदोही पूर्वांचल की राजनीति में अहम स्थान रखती है। यहां से केंद्रीय और प्रदेश सरकार की कैबिनेट में कई राजनीतिक धुरंधरों ने प्रतिनिधित्व भी किया है। इसके कारण पूर्वांचल के राजनीतिक पंडितों की निगाहें भी जिले की राजनीतिक गतिविधियों पर टिकी रहती हैं। दरअसल तीन विधानसभा सीटों वाले जिले में दो विधानसभा में भाजपा जबकि एक पर निषाद पार्टी के विधायक काबिज हैं। 2014 के बाद 2019 में भी भाजपा के सांसद बने, हालांकि 2021 के पंचायत चुनाव की रिपोर्ट ने पार्टी के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। कांग्रेस जहां एक भी सीट नहीं निकाल सकी वहीं बसपा भी गिरते-पड़ते एक सीट पर काबिज हो सकी। दोनों दलों की हालत विधानसभा, लोकसभा जैसी ही बनी हुई है।
जिलाध्यक्ष से लेकर अन्य पदाधिकारियों में फेरबदल का भी असर नहीं पड़ा। हाल ही में हुए जिला पंचायत चुनाव में राजनीतिक दलों के जीते हुए अधिकृत उम्मीदवारों की सूची पर नजर डाले तो तो सपा के 10, भाजपा के चार, बसपा के तीन, कांग्रेस शून्य, निषाद पार्टी का एक और 8 निर्दल उम्मीदवार जीते हैं। वैसे तो निर्दल उम्मीदवार किसी भी तरफ जा सकते हैं, लेकिन जरूरी अंक के लिए भाजपा को अधिक मेहनत करनी नहीं पड़ेगी। 26 सीटों के आए निर्णय पर नजर डाली जाए तो सपा के भले ही अधिक सदस्य जीते, लेकिन भाजपा के कई प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे। ऐसे में आगामी विस चुनाव में सपा-भाजपा के बीच सीधी टक्कर होने की उम्मीद देखी जा रही है।
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जिले में बनते राजनीतिक समीकरण और विजयी उम्मीदवारों पर नजर डाली जाए तो निर्दल सपा और भाजपा के खेवनहार बनेंगे। राजनीतिक जानकारों की माने तो 2022 के चुनावों में पंचायत चुनाव का काफी असर पड़ेगा। 26 जिला पंचायत सदस्य वाले जिले में भाजपा को उम्मीद के हिसाब से परिणाम नहीं आ सका। निषाद पार्टी के बढ़ते ग्राफ ने कहीं न कहीं बसपा, कांग्रेस संग भाजपा के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है। एक प्रत्याशी ने जीत दर्ज की जबकि कई सीटों पर रनरअप रहे।
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