ज्ञानपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का परिणाम आने के बाद अब अध्यक्ष की कुर्सी पर सभी की निगाहें टिक गई हैं। पहली बार सपा-बसपा और भाजपा के पास बहुमत नहीं दिख रहा है। ऐसे में निर्दलीय ही अब जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी का भविष्य तय करेंगे। भाजपा-सपा उन्हें अपने पाले में खिंचने के लिए हर कोशिश में जुट गई हैं। भाजपा का अध्यक्ष बना तो तीन दशक का रिकार्ड टूटेगा।
जिले में पहले चरण में 15 अप्रैल को मतदान संपन्न हुआ था। 26 जिला पंचायत समेत ग्राम प्रधान, बीडीसी और ग्राम पंचायत सदस्य के सीटों पर वोट पड़े थे। इसके बाद रविवार से शुरू हुई मतगणना में प्रधान और बीडीसी के विजेता घोषित हो गए, लेकिन जिला पंचायत सदस्य के विजेता मंगलवार को देर रात तक घोषित हुए। 26 जिला पंचायत सीटों में 4 भाजपा, 10 सपा, एक निषाद पार्टी और तीन बसपा समर्थित उम्मीदवार जीते हैं जबकि 10 निर्दल ने बाजी मारी है। अब जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी के लिए गुणागणित शुरू हो गई है। देश की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को जहां उम्मीद के हिसाब से रिजल्ट नहीं मिला तो वहीं सपा और बसपा भी बहुमत के करीब नहीं पहुंच सकी। इसके बाद चुनाव के समय जिन्हें टिकट देने से सभी दल कतराते रहे। अब उन्हीं जीते हुए प्रत्याशियों को अपनी तरफ खिंचने की हर संभव कोशिश की जा रही है।
अध्यक्ष की कुर्सी किसके हाथ जाएगा यह तो भविष्य के गर्भ में छिपा है। लेकिन सभी दल अपनी जुगत में लग गए हैं। सन 1995 से लेकर 2015 तक कुल छह बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा जबकि बीच में एक बार साल 2010 में बसपा की श्यामला सरोज को जिले के प्रथम नागरिक बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। अभी तक भाजपा एक बार फिर भी अध्यक्ष तक नहीं पहुंच सकी है। सूबे में सत्ता होने से पहली बार अध्यक्ष बनने की उम्मीद भाजपा की अधिक लग रही है। निर्दलियों को अपने पाले में लाने के लिए हर हथकंडे अपनाए जा सकते हैं।
जिले के सबसे बड़े सदन की चाभी 1995 से लेकर 2015 तक ज्यादातर समय ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्र के पास ही रही। यहां अवगत करा दें कि शिवकरन यादव भदोही जनपद के गठन के बाद जिला पंचायत के प्रथम अध्यक्ष रहे। लेकिन उनके बाद रामलली मिश्रा, विजय मिश्र, रीना सोनकर, काजल यादव जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं। इस क्रम में श्यामला सरोज को छोड़ दिया जाए तो परोक्ष और अपरोक्ष रूप से विधायक के हाथ में ही अध्यक्ष की चाभी रही। रिश्तेदार से विवाद के कारण करीब नौ माह से विधायक आगरा जेल में बंद हैं। ऐसे में पहली बार भाजपा अध्यक्ष के लिए पूरी ताकत लगा देगी।