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अब एक्सपो मार्ट से हटेगा कोविड अस्पताल

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ज्ञानपुर। कारपेट एक्सपो मार्ट में चल रहा कोविड अस्पताल जल्द ही हटेगा। एक्सपो मार्ट के संचालन का निर्देश मिलने पर प्रशासनिक अमले की ओर से तैयारी शुरू कर दी गई है। माना जा रहा है कि जल्द ही एक्सपो मार्ट कालीन कारोबार के लिए शुरू हो जाएगा।
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करीब 220 करोड़ की लागत से भदोही में बनकर तैयार एक्सपो मेगा मार्ट दो साल तक हैंडओवर नहीं हो सका। कोरोना संक्रमण काल में उसे हैंडओवर किया गया, लेकिन उसके बाद संक्रमित मरीजों को आइसोलेट करने के लिए उसे एल-1 अस्पताल बनाया गया। बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई समीक्षा बैठक में एक्सपो मार्ट के संचालन का निर्देश दिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि कारपेट मार्ट को इन दिनों कोरोना काल में कोविड अस्पताल बनाया गया है तो मुख्यमंत्री ने कहा कि उसमें कोविड अस्पताल बहुत जरूरी नहीं है। वैसे भी अधिकतर संक्रमित होम आइसोलेशन में रहने के कारण एक्सपो मार्ट के अस्पताल में अब मरीजों की संख्या गिनती की रह गई है। इसको देखते हुए प्रशासन अब मार्ट को कालीन कारोबार के लिए चलाने में जुट गया है।
कुछ माह पूर्व कारपेट एक्सपो मार्ट का संचालन कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) को देने का निर्णय हुआ था। इसमें 10 साल तक लीज पर चलाने की बात हुई थी। एक्सपो मार्ट चलने से भदोही ही नहीं मिर्जापुर, वाराणसी आदि क्षेत्र के कालीन कारोबारी मेले में कालीनों को बेहतर ढंग से बेच सकेंगे। जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि सीएम के निर्देश पर अब एक्सपो मार्ट से कोविड अस्पताल हटाया जाएगा। सीईपीसी और कालीन से जुड़े अन्य संगठनों से चर्चा के बाद उसे संचालित किया जाएगा।
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बायोफ्यूल प्लांट के लिए 40 एकड़ जमीन चिह्नित
ज्ञानपुर। 2007 से बंद चल रही औराई चीनी मिल परिसर में बायोफ्यूल प्लांट लगाने के लिए मुख्यमंत्री से हरी झंडी देने के बाद कवायद तेज हो गई है। हालांकि इसके लिए ज्यादातर कार्य शासन स्तर पर ही किए जाएंगे। 1200 करोड़ की लागत से बनने वाले प्लांट के लिए प्रदेश सरकार ऑयल कंपनियों से सलाह-मशविरा कर मसौदे को गति देगी। साल भर पूर्व प्रशासन की ओर से चीनी मिल की मौजूदा स्थिति के दृष्टिगत मिल को दोबारा चलाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। चीनी मिल परिसर की 40 एकड़ जमीन पर दोबारा मिल चलाने के लिए 231 करोड़ की जरूरत प्रशासन ने बताई थी। प्रशासन का कहना था कि लंबे समय से मिल बंद रहने के कारण उसकी मशीनें खराब हो चुकी हैं। बायोफ्यूल प्लांट की मदद से फसलों के अवशेष और कूड़े-कचरे का उपयोग कर ईंधन बनाया जाएगा। जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि शासन को मिल दोबारा चलाने संबंधी प्रस्ताव भेजा गया था। हालांकि शासन वहां बायोफ्यूल प्लांट लगाने को लेकर गंभीर है। इस मसले पर ऑयल कंपनियों से बात कर जल्द ही शासन स्तर पर ही निर्णय लिया
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