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अब भदोही में कालीन एक्सपो की तैयारी में जुटा सीईपीसी

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रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध व कोविड जैसी विषम परिस्थितियों के बाद भी नई दिल्ली कारपेट एक्सपो को कालीन निर्यातकों ने सफल बताया है। उनका कहना है कि जिस प्रकार से लोग आयातकों की भागीदारी को लेकर असमंजस में थे, वैसा कुछ नहीं हुआ। एक्सपो ने कालीन उद्योग की उम्मीदों को बरकरार रखा है। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के चेयरमैन ने कहा है कि भदोही का कारपेट एक्सपो नई दिल्ली एक्सपो से बेहतर होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि भदोही में प्रस्तावित एक्सपो से काफी संख्या में मझोले निर्यातकों को भी लाभ होगा।
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उन्होंने कहा कि दिल्ली में दो वर्ष बाद कारपेट एक्सपो का आयोजन हुआ है। एक्सपो से पूर्व कुछ लोगों का मत था कि विदेशी खरीदारों की आमद कम होगी, जबकि कुछ का कहना था कि दो वर्ष बाद फेयर होने से आयातक भारत आने के लिए उत्सुक हैं। इसी बीच यूक्रेन-रूस युद्ध शुरू हो गया, तो कुछ और फिर आशंकित हो गए। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के चेयरमैन उमर हमीद ने कहा कि नकारात्मक सोचना समस्या का निदान नहीं है। कोविड-19 से सभी देश तेजी से उबर रहे हैं। यदि हम एक्सपो के आयोजन की पहल नहीं करते तब भी कुछ लोग शिकायत करते। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध का भारतीय निर्यात से कोई मतलब नहीं था। रूस और यूक्रेन भारत के कुल कालीन निर्यात का एक प्रतिशत भी खरीदार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि बहुत से मझोले कालीन निर्यातकों ने इस एक्सपो में यह सोच कर भाग लिया कि घर बैठे रहने से अच्छा है कि कुछ प्रयास किया जाए और इस फेयर ने किसी को निराश नहीं किया। उन्होंने कहा कि हम भदोही में एक्सपो की तैयारी में जुट गए हैं और नई दिल्ली से भी बढ़िया आयोजन इस बार भदोही में होगा।
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