ज्ञानपुर। पर्यावरण के लिए घातक प्लास्टिक बैग से लोगों का मोह नहीं भंग हो रहा। प्रतिबंध के बाद भी जिले में धड़ल्ले से उपयोग हो रहा। सब्जी, मिठाई, दूध की दुकान से लेकर अन्य स्थानों पर बेरोकटोक उपयोग में लाया जा रहा है। प्रशासनिक स्तर से कार्रवाई होने के बाद भी व्यापारी से लेकर आम आदमी भी सजग नहीं हो रहे। एनजीटी और सुप्रीमकोर्ट की सख्ती के बाद दो साल पूर्व सरकार ने प्लास्टिक के प्रयोग पर बैन लगा दिया।
करीब तीन से चार माह तक प्रशासनिक स्तर से कार्रवाई भी की गई, लेकिन धीरे-धीरे ढाक के पात वाली कहावत चरितार्थ हो गई। पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूक लोग भी भूल गए और अफसर भी सुस्त पड़ गए। जिसके कारण प्लास्टिक बैग के प्रयोग में तेजी से इजाफा हुआ। सुबह से लेकर शाम तक किराना, सब्जी, मीट समेत अन्य दुकानों पर प्लास्टिक का प्रयोग तेजी से होने लगा। इससे वातावरण प्रदूषित होने के साथ महामारी फैलने की गंभीर आशंका बनी रहती है। प्रशासनिक आंकड़ों पर गौर किया जाए तो दो साल में करीब 250 से अधिक व्यापारियों पर जुर्माना की कार्रवाई की गई। 10 क्विंटल से अधिक प्लास्टिक जब्त की गई, लेकिन उसके बाद भी प्लास्टिक का प्रयोग नहीं थम रहा। प्लास्टिक के निस्तारण की कोई सुविधा नहीं है। इससे कचरे को जहां-तहां फेंक दिया जाता है।
प्रभागीय वनाधिकारी आलोक सक्सेना ने कहा कि प्लास्टिक जल, थल और नभ तीनों के लिए खतरा है। मिट्टी में सैकड़ों साल तक नष्ट न होने से वहां बंजर हो जाता है। प्लास्टिक जलाने से हवा में जहरीली गैस जबकि पानी में जलीय जंतुओं के लिए खतरनाक है। हर नागरिक को चाहिए कि पर्यावरण संरक्षा के लिए प्लॉस्टिक से दूरी बनाएं। जिले में प्लास्टिक के प्रयोग का प्रशासन के पास कोई आंकड़ा नहीं है, हालांकि सौ एमटी कूड़ा प्रतिदिन नगरीय इलाकों में निकलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम से कम 20 एमटी प्लास्टिक का प्रयोग जिले में होता है।