संवाद न्यूज एजेंसी
ज्ञानपुर। संतान की लंबी उम्र की कामना से रविवार को जिले भर में माताओं ने पारंपरिक तरीके से निर्जला व्रत रख कर जीवित्पुत्रिका पर्व मनाया।
शाम चार बजे के बाद जिउतिया यानी मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा की गई।
व्रती महिलाएं दोपहर बाद स्नान-ध्यान करके साफ कपड़े धारण करके शाम चार बजे के करीब हाथों में पूजा की थाल लेकर गाजे-बाजे के साथ मंदिरों, गंगा घाटों और सरोवरों के किनारे पहुंचीं।
जहां बनी वेदी पर विधि विधान पूर्वक से पूजन अर्चन किया। इसके बाद व्रती महिलाओं ने पांच कहानियां सुनीं। महिलाओं ने जिउतिया माता की पूजा कर सुख-सौभाग्य की कामना की। जगह-जगह भीड़ उमड़ने से मेले जैसा माहौल रहा।
भिदिऊरा निवासी आचार्य गणेश पांडेय ने बताया कि पुत्र की प्राप्ति एवं उनके दीर्घायु के लिए जीवित्पुत्रिका का कठिन व्रत महिलाएं करती हैं।
निर्जला व्रत रख कर महिलाएं सुबह से ही पूजन की तैयारियों में लगी रहीं। तरह-तरह के पकवान बनाने के बाद दोपहर में पूजन सामग्री के साथ महिलाएं मां जिउतिया की पूजा की।
इसके बाद महिलाओं ने प्रतीक के रूप में सोने या चांदी की जिउतिया को गले में धारण किया।
ज्ञानपुर, भदोही, घोसिया, औराई, ऊंज, चौरी, मोढ़, जंगीगंज, खमररिया, महराजगंज, बाबूसराय, सुरियावां, मोढ़ आदि इलाकों में महिलाओं ने आस्था के साथ जिउतिया माता का पूजन की।
भडूकी की रागिनी, वृदांवन विहार कॉलोनी की प्रिया, अमावां की सीमा यादव ने बताया कि पहली बार व्रत रखा। व्रत को लेकर बड़ी ही उत्साहित रहीं। जिसकी तैयारी में पहले से जूटी रही। बताया कि सब कुछ अच्छे से संपन्न हुआ। मां की कृपा हर व्रती महिलाओं पर बनी रहे।