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आफत में नवजातों की जान, महकमा अनजान- स्वास्थ्य प्लान की दूसरी खबर

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ज्ञानपुर। नवजात बच्चों की मौत का मामला कालीन नगरी में स्वास्थ्य महकमे के लिए बड़ी चुनौती बनने वाली है। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग इसको लेकर बेपरवाह है। विभाग को न तो समस्या का भान है ना ही ऐसे हालात से निपटने की समुचित तैयारी की गई है। भगवान ना करे, लेकिन अगर कोटा जैसे हालात यहां हो जाएं तो उसे थामना विभाग के लिए मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो जाएगा।
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जिले में महाराजा चेतसिंह और महाराज बलवंत सिंह दो जिला चिकित्सालय हैं। बच्चों के लिए बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी गुप्ता और बीएस दूबे अस्पताल आते हैं और एक चिकित्सक की ओर से वीआरएस के लिए आवेदन किया गया है। बच्चों के वार्ड के नाम पर प्रसव कक्ष में ही सुविधाएं देने का प्रयास किया जाता है। गंभीर बीमारी की हालत में बच्चों को अन्यत्र रेफर किया जाता है। 102 एंबुलेंस (खुशियों की सवारी) की संख्या चार है, जिसमें दो की हालत जर्जर है। कमोबेश यही हाल महाराजा बलवंत सिंह चिकित्सालय की है। यहां भी दो बाल रोग विशेषज्ञ नियुक्त हैं लेकिन समय से अस्पताल नहीं आते। आधुनिक सुविधाओं के नाम पर दोनो अस्पतालों में बच्चों के लिए कोई खास इंतजाम नहीं है।
प्रभारी जिला अस्पताल अधीक्षक डॉ. महेंद्र कुमार ने कहा कि दो बाल रोग विशेषज्ञों से बच्चों की देखभाल की जाती है। एसएनसीयू बनवाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। विशेष परिस्थिति में बच्चों को रेफर किया जाता है।
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एसएनसीयू साबित होगी संजीवनी
ज्ञानपुर। शिशु मृत्युदर कम करने के लिए एमबीएस में निर्माणाधीन सीक न्यूबार्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) नवजात के लिए संजीवनी साबित होगी। जन्म के समय कमजोर और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे नवजातों को इस यूनिट में आक्सीजन, एक्यूवेटर, फोटो थेरापी सहित अन्य विधियों से इलाज की सुविधा उपलब्ध होगी। उक्त यूनिट में प्री मेच्योर बेबी, न्यूमोनिया, जांडिस, श्वांस संबंधित बीमारियां को उपचार होगा।
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