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Bhadohi News: निगेटिव ग्रुप का रक्त खत्म, ए पॉजिटिव एक और एबी पॉजिटव सिर्फ दो यूनिट ही बचा

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ज्ञानपुर जिला चिकित्सालय का ब्लड बैंक। संवाद
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ज्ञानपुर। महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक की क्षमता 150 यूनिट रक्त की है। वर्तमान में ब्लड बैंक में सिर्फ 25 यूनिट ही रक्त उपलब्ध है, जबकि हर दिन की खपत करीब पांच यूनिट है। वहीं निगेटिव ग्रुप का खून खत्म हो चुका है। ब्लड बैंक में करीब 5 दिन के लिए सिर्फ 25 यूनिट खून बचा है। निगेटिव ग्रुप का ब्लड लेने के लिए आने वाले मरीजों को निजी अस्पताल में जाकर व्यवस्था करनी पड़ती है। यदि अगले कुछ दिन में कोई रक्तदान शिविर नहीं आयोजित किया गया, तो स्टॉक खत्म होने का खतरा है।
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जिला अस्पताल में रोजाना 700 से 800 मरीजों की ओपीडी होती है। इसके अलावा 70 के करीब इमरजेंसी होती है। ऑपरेशन कराने वाले मरीजों को रक्त की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा निजी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को भी खून की जरूरत होती है तो वह जिला अस्पताल की तरफ रूख करते हैं, लेकिन मई के अंतिम सप्ताह से ब्लड बैंक में खून के स्टॉक की स्थिति खराब हो गई है।
इंडियन रेडक्रास, अमर उजाला फाउंडेशन समेत कुछ संगठनों की तरफ से साल में एक या दो बार रक्तदान का शिविर का आयोजन होता है। इसके अलावा स्वैच्छिक रक्तदान शिविर न होने से ब्लड बैंक में खून की कमी हो गई है। जिससे जरूरतमंद को निजी ब्लड बैंक का रूख करना पड़ता है। जहां मनमुताबिक चार्ज लिया जाता है।
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ब्लड बैंक में बाहर से आने वाले मरीजों को 1050 फीस और रक्तदान करने के बाद संबधित ग्रुप का खून दिया जाता है जबकि अस्पताल में भर्ती मरीज को निशुल्क मिलता है। वर्तमान में ब्लड बैंक में बी निगेटिव ग्रुप का खून शून्य है। यही हाल ओ, एबी, ए निगेटिव का है। जरूरत पर इन ग्रुप के मरीजो को जिला अस्पताल से लौटना पड़ता है। ए और एबी पॉजिटव ग्रुप का खून भी एक और दो यूनिट ही है।
ब्लड बैंक में खून की उपलब्धता

ओ पॉजिटिव - 05 यूनिट
ए पॉजिटिव – 1 यूनिट

एबी पॉजिटिव - 2 यूनिट
बी पॉजिटिव - 17 यूनिट
ए निगेटिव – शून्य
बी निगेटिव – शून्य

एबी निगेटिव - शून्य

ओ निगेटिव - शून्य
दो चिकित्सक सहित कुल 14 कर्मचारियों की तैनाती
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में दो डॉक्टर सहित कुल 14 स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती है। एलटी, स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वाॅय, कंप्यूटर ऑपरेटर को मिलाकर कुल 14 कर्मचारी है। जो नियमित अपनी डयूटी करते हैं। रेडक्रांस, स्वयं सेवी संस्था के माध्यम से समय समय पर रक्तदान शिविर आयोजित किया जाता है।

इन मरीजों में खून की कमी
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉक्टर प्रदीप यादव ने बताया कि थैलेसीमिया, किडनी, सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्त, गर्भवती महिला को खून की जरूरत पड़ती है। जिले में थैलेसीमिया के जो मरीज हैं, वह बाहर ही उपचार करवाते हैं। विभाग के पास पुख्ता डाॅटा नहीं है। हर महीने औसतन 700 से 800 प्रसव होते हैं। इसमें से 50 प्रसव पीड़िता को ब्लड की जरूरत पड़ती है।
ब्लड बैंक से हर जरूरतमंद व्यक्ति को खून मिलता है। स्वयं सेवी संस्थाएं समय समय पर रक्तदान शिविर लगाती रहती हैं। लोगों को रक्तदान करना चाहिए। यहां लोग केवल रिप्लेसमेंट के आधार पर ही रक्तदान कर रहे हैं, इससे इमरजेंसी के लिए रिजर्व स्टॉक खत्म होता जा रहा है। उन्होंने लोगों से रक्तदान करने की अपील की है। - डॉ. एसके चक, सीएमओ भदोही
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