रामपुर गंगा घाट पर मृतक जवान का शव ले जाते आर्मी के जवान। संवाद
- फोटो : Archive
सुरियावां। असम में प्रशिक्षणरत सीआरपीएफ जवान बृजेश मौर्य की असामयिक मौत से कसियापुर गांव में शोक का माहौल है। सोमवार को भोर में साढ़े तीन बजे जवान का पार्थिव शरीर घर पहुंचा। जहां अंतिम दर्शन के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा। ग्रामीणों ने पांच मांग पूरी करने के लिए करीब एक घंटे तक शव को रोके रखा। अंत में राजकीय सम्मान के साथ रामपुर घाट पर अंतिम संस्कर किया गया।
कसियापुर निवासी श्याम नारायण मौर्य के दो बेटों में बृजेश छोटा था। छह महीने पहले उसका चयन सीआरपीएफ में हुआ। असम में प्रशिक्षण के दौरान शनिवार को बीमारी से उसकी मौत हो गई। रविवार को भोर में सेना के वाहन से शव कसियापुर गांव पहुंचा। जहां भोर से लेकर सुबह तक कई गांव के ग्रामीण, अधिकारी पहुंच गए। डीएम-एसपी के आने की मांग पर ग्रामीण अड़े रहे, हालांकि सुबह करीब सात बजे डीएम शैलेष कुमार और एसपी अभिनव त्यागी भी पहुंच गए। उस दौरान हर आंख नम थी और माहौल गमगीन। गांव की गलियां सिसकियों और श्रद्धांजलि के नारों से गूंज उठीं। जवान के घर का दृश्य बेहद मार्मिक था।
ग्रामीणों ने कसियापुर से देवी मंदिर मार्ग का नामकरण उसके नाम, परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी, पांच करोड़ मुआवजा, पीएचसी का नाम जवान के नाम और शहीद पार्क बनाने की मांग किया। ज्ञानपुर के निषाद पार्टी के विधायक विपुल दूबे संग अधिकारियों ने मांग पूरी करने का आश्वासन दिया। इस मौके पर एसडीएम अरूण दीक्षित, भरत राज सिंह, अरूण मौर्य, ओम प्रकाश यादव, जगजीवन राम मौर्य, वन शुक्ला, जिलाध्यक्ष दीपक मिश्रा, ताड़कनाथ सरोज आदि रहे।