जिले में नाबालिग के वाहन चलाने से कई बार बड़े हादसे हुए हैं। इसके बाद भी नाबालिगों के वाहन चलाने के मामले कम नहीं हो रहे हैं। यातायात विभाग की टीम ने बीते एक साल में नाबालिग चालक को देखकर 1086 वाहनों का चालान किया है।
हर माह औसतन 90 के आसपास नाबालिगों के वाहन चलाने पर चालान किया जा रहा है। अभिभावक 27.15 करोड़ रुपये का चालान भर चुके हैं। इसके बावजूद बच्चों को वाहन दे रहे हैं। जिले में यातायात विभाग की ओर से लगातार अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें यातायात नियमों के उल्लंघन पर वाहनों का चालान किया जा रहा है।
बीते अगस्त माह में ही यातायात टीम ने 7081 वाहनों का चालान किया था। जिसमें बिना हेलमेट वाले चालानों की संख्या 4767 थी। हेलमेट न लगाने पर हर दिन औसतन 300 वाहनों का चालान हो रहा है।
जिले में ही कई बार नाबालिगों के वाहन चलाने से लोगों की मौत भी हो चुकी है। इसके बाद भी वाहन स्वामी और किशोरों के अभिभावकों की ओर से बच्चों को वाहन दिया जा रहा है।
यातायात प्रभारी राकेश सिंह ने बताया कि नाबालिगों के हाथों में स्टेयरिंग देना माता-पिता की बड़ी गलती है। इससे न सिर्फ उस बच्चे की जान खतरे में रहती है, बल्कि सड़क सुरक्षा की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में रहती है।
हर दिन इस तरह के वाहनों का चालान भी होता है। एक साल में 1086 वाहनों का चालान हुआ है। इसके चालक नाबालिग थे। किशोर के वाहन चलाने पर पहली बार 25 हजार का चालान है। अगर सुधार नहीं हुआ तो आगे और नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।