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जिले के 198 गांवों में महिलाओं के हाथ में मिनी बैंक

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को बीसी सखियां पूरा करने में जुट गई हैं। 546 ग्राम पंचायतों में से अब तक 198 गांवों तक बीसी सखी ने अपनी पहुंच बना ली है। योजना से स्वरोजगार को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं बैंकिंग बोझ भी कम हो गया है। कोरोना काल में लाभार्थियों के घर तक महिलाओं ने पैसे के लेनदेन को लेकर समस्या नहीं पैदा होने दी।
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राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़ी समूह की महिलाओं को स्वरोजगार के माध्यम से आगे बढ़ने के लिए बीसी सखी योजना चलाई जा रही है। महिला सशक्तीकरण अभियान को गति प्रदान करने के लिए 22 मई 2020 में शुरू हुई योजना में महिलाएं घर-घर जाकर लोगों को डिजिटल संसाधनों के जरिए बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने एवं पैसों के लेन-देन को आसान बनाने का काम कर रही हैं। इसके बदले उन्हें 6 महीने तक चार हजार रुपये की धनराशि प्रोत्साहन के रूप में सरकार दे रही है। उसके बाद कमीशन के आधार पर उन्हें सहायता दी जा रही है। कोरोना की पहली और दूसरी लहर में लॉकडाउन होने पर बीसी सखी काफी सहायक बनीं। केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं में मिलने वाली सहायता को लाभार्थी तक पहुंचाने से लेकर बैंकों में जमा कराने तक का काम सखी बहनों ने किया। आंकड़ों पर गौर करें तो जिले की 546 ग्राम पंचायतों में अब तक 326 गांवों में बीसी सखी के चयन की प्रक्रिया चल रही है। जिसमें 198 गांवों में बीसी सखी बेहतर ढंग से काम कर रही हैं। डीसी एनआरएलएम श्यामजी ने बताया कि बीसी सखी को छह महीने सरकार चार-चार हजार प्रोत्साहन राशि देती है। उसके अलावा जरूरी उपकरण की खरीद आदि को लेकर सहायता सरकार देती है। उसके बाद उन्हें 75 हजार रुपये दिए जाते हैं।
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