लालानगर टोलप्लाजा के पास ढाबे पर खड़ी बसें।
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ज्ञानपुर। बिहार और बंगाल से सड़क मार्ग से परदेश रवाना होने वाले प्रवासियों का राजमार्ग के होटल-ढाबों पर लगने वाली भीड़ से महामारी के कुपित होने का खतरा बढ़ गया है। जिले के बाबूसराय से लेकर प्रयागराज सीमा से सटे ऊंज तक हाईवे पर पड़ने वाले दर्जनों होटल-ढाबों पर इन दिनों प्रवासियों का खाने-पीने और ठहरने आदि को लेकर मजमा लगा रहता है। मेले जैसी भीड़ देखकर लोग सहसा ही सहम जा रहे हैं कि कहीं महामारी को पांव पसारने का और मौका न मिल जाए।
नवंबर माह तक मुंबई, अहमदाबाद, सिकंदराबाद, सूरत, दिल्ली की ओर जाने वाली ट्रेनों में जगह न होने के कारण पटना, बिहार, धनबाद, झारखंड, रांची जैसे पूर्वी प्रदेशों में आर्थिक तंगी का दंश झेलने वाले प्रवासियों का पलायन इन दिनों लग्जरी बस, ट्रक, माल वाहन से शुरू हो चुका है। किसी भी समय राजमार्ग संख्या-19 के दोनों किनारों पर बिना पंजीकरण धड़ल्ले के साथ चल रहे होटल और ढाबे प्रवासियों से गुलजार देखे तो जा रहे हैं कि होटल-ढाबा संचालक शासन-प्रशासन की ओर से रोकथाम के लिए जारी किए गए नियमों का खुलेआम उल्लंघन पर प्रभावी कदम नहीं उठा पा रहे हैं। गत माह से चल रही इस मनमानी पर न पुलिस प्रशासन का ही कोई प्रभाव दिख रहा है संबंधित तहसील प्रशासन का। बेखौफ ढंग से होटल-ढाबा संचालक प्रवासियों से स्नान, ठहराव, खाना के नाम पर आर्थिक दोहन कर तंगी में उलझने बढ़ा रहे हैं। 10 से 10 घंटे तक सफर करने वाले प्रवासियों के दल को उन्हीं होटल-ढाबों को चिह्नित कर रुकवाया जा रहा है, जहां उन्हें सुविधाएं मिलती हैं। तीन माह तक चले संपूर्ण लॉकडाउन में फंसा लाखों प्रवासी परिवार पैदल, वाहनों से किसी तरह अपने-अपने मूल स्थानों पर तो पहुंच गया, लेकिन कमाई का अधिकांश हिस्सा आने-जाने में ही खर्च होने पर परिवार का खर्च चला पाना उनके लिए मुश्किल खड़ी कर दी। शासन स्तर से भी अनलॉक की घोषणा कर लॉकडाउन में कुछ राहत तो दी, लेकिन वह मंशा फलीभूत नहीं हो सकी जिसकी जरूरत थी। अनलॉक में महानगरों तक पहुंचने के लिए प्रवासियों ने रेल मार्ग से जाने की भरपूर कोशिश तो की टिकट के अभाव में सड़क मार्ग से यात्रा करना विवशता देखी जा रही है।