ज्ञानपुर। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के बीएड विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार शुक्रवार को समापन हो गया। इस दौरान समापन सत्र के मुख्य अतिथि राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि शिक्षा का सार्थकता तभी तक है जब वह नागरिकों में अच्छे व्यक्तित्व का विकास करें और शिक्षार्थियों के अंदर उचित जीवन दृष्टि केे पैदा कर सकें । शिक्षा नीति ऐसी हो जो शिक्षार्थियों में एकेडमिक स्किल्स, कम्यूनिकेशन स्किल्स, और प्रोफेशनल स्किल्स के साथ ही लाइफ स्किल्स को बढ़ाए ।
मुख्य अतिथि ने कहा कि छात्रों में कैरियर निर्माण के अतिरिक्त सामाजिक सरोकारों व राष्ट्रीय दायित्वों का बोध कराना ही शैक्षणिक संस्थानों की वास्तविक सार्थकता है। विशिष्ट अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय के डीन प्रो. पीसी शुक्ला ने नई शिक्षा नीति की प्रशंसा करते हुए कहा कि शिक्षा वहीं है जिसे आत्मसात किया जा सकें । शिक्षा नीति में प्रमुख चुनौती प्राथमिक स्तर से जुड़ी हुई है और उसके निराकरण के लिए पूर्व में बनाई गई ट्रिनिटी व्यवस्था के अनुरूप हमें बुनियादी स्थल तक पहुंचना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि राजनीति में शिक्षा की जरूरत है न कि शिक्षा में राजनीति की आवश्यकता है।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. पीएन डोंगरे ने मुख्य अतिथि व विशिष्ठ अतिथि को बैज अलंकरण, अंगवस्त्रम व स्मृति चिह्न प्रदान करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया। प्राचार्य डॉ. पीएन डोंगरे ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में स्थित इस महाविद्यालय ने इनोवेशन के क्षेत्र में विगत दो वर्षों में सराहनीय प्रयास किया है। इस मौके पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में हुई चर्चाओं की संक्षिप्त रिपोर्ट डॉ. प्रतीक उपाध्याय ने प्रस्तुत किया। डॉ. प्रियंका सिंह व जगदीश्वर सिंह ने आमंत्रित व्याख्यान दिया । तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर अरविंद कुमार पांडेय ने की। सेमिनार में कई छात्र-छात्राओं ने शोध पत्र का वाचन भी किया। संचालन सर्वेशानंद और धन्यवाद ज्ञापन संयोजक डॉ. लोकपति त्रिपाठी ने किया । इस अवसर पर डॉ. रमेश यादव, डॉ. एसके यादव, डॉ.अरुण कुमार कुशवाहा, डॉ. रविंद्र पांडेय, डॉ.आरपी यादव,डॉ. रोशन प्रसाद, डॉ. कल्पना अवस्थी, डॉ. महेंद्र त्रिपाठी आदि रहे।