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लॉकडाउन में सोशल मीडिया पर खूब निभी दोस्ती

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ज्ञानपुर। लगभग ढाई महीने के लॉकडाउन के बाद भी जिंदगी पूरी तरह पटरी पर नहीं आ पाई है। कोरोना वायरस कोविड-19 ने जिंदगी जीने का सलीका बदलने का संदेश दे दिया है। सो, क्या लॉकडाउन और क्या अनलॉक। अगर पूरे रस से जिंदगी जीनी है तो कोई ऐसा उपाय खोज निकालना होगा, जिससे काम भी हो जाए और सुरक्षित भी रहें। जी हां! लॉकडाउन में घर में बंद होकर भी खुद को ऑनलाइन सक्रिय रखने वाली कालीन नगरी की आधी आबादी का कुछ ऐसा ही मानना है।
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बुधवार को अमर उजाला ने लॉकडाउन के दौरान महिलाओं की सामाजिक दुनिया पर नजर डाली तो पता चला कि उन्होंने लॉकडाउन का पूरा मजा लिया। सखी-सहेलियों से मिलने-जुलने का समय और आपसी गपशप नहीं हुई तो क्या हुआ। फेसबुक, व्हाट्सएप और अन्य सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने इसकी कमी नहीं खलने दी। गोपीगंज की माया दुबे कहती हैं कि लॉकडाउन में घर-परिवार के सभी सदस्यों के साथ समय बिताने का जो मौका मिला था, उसका पूरा आनंद लिया। साथ ही सहेलियों और अपने ग्रुप की महिलाओं से ऑनलाइन जुड़ी रही। महसूस ही नहीं हुआ कि हम लॉकडाउन में हैं।
अनुराधा अग्रवाल ने कहा कि लॉकडाउन के बाद भी अभी एहतियात बरता जाना जरूरी है। इसका पूरा ध्यान रख रही हूं। बाजार भी निकलने से बचना पड़ रहा है। इसलिए ऑनलाइन खरीदारी और भुगतान पर ज्यादा ध्यान दे रही हूं। रीता जायसवाल ने कहा कि लॉकडाउन में घर पर ही परिवार के सभी सदस्यों को अच्छे-अच्छे व्यंजन जहां बनाकर खिलाया, वहीं नई रेसिपी बनाना भी सीखा। खास बात यह कि रेसिपी को व्हाट्सएप पर दोस्तों के साथ शेयर भी किया। मंजू गुप्ता कहती हैं कि शादी-पार्टी आदि में आना-जाना नहीं हो पाया, लेकिन उसका पूरा आनंद घर पर बच्चों के साथ लिया। ऐसा मौका कम ही मिलता है।
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