ठेले पर सब्जी बेचने के लिए निकला सैफ (दाएं) साथ में है 12 वर्षीय सोनू।
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भदोही। लॉकडाउन में पिता की कवाब-पराठे की पुरानी दुकान बंद होने के बाद दो मासूमों को सब्जी बेचने का काम शुरू करना पड़ा। 15 साल का सैफ और 12 साल का सोनू ठेले पर सब्जियां लादकर घूम-घूमकर बेचते हैं। इसी से परिवार की आजीविका चलती है।
लगभग 75 दिन के लॉकडाउन ने गरीबों की कमर तोड़ कर रख दी है। इस दौरान जो स्थायी दुकानें थीं, वो बंद हो चुकी हैं और लॉकडाउन हटने के बाद उनकी जगह दूसरी दुकानों ने ले ली है। इससे कई लोगों के कारोबार या तो बंद हो गए अथवा धंधा बदलना पड़ा। नतीजा यह हुआ कि छोटे-छोटे बच्चों को भी घर वालों की मदद के लिए सड़क पर उतरना पड़ा है। ऐसे ही नगर के मछरहट्टा रोड के वकील का 15 वर्षीय पुत्र मो. सैफ है, जो ठेले पर गली गली घूम कर सब्जी बेच कर माता-पिता के लिए सहारा बना हुआ है।
वकील लॉकडाउन से पहले ठेले पर कबाब-परेठा की दुकान लगाते थे। लॉकडाउन हुआ तो दुकान दो महीने के लिए पूरी तरह बंद हो गई। इससे परिवार के लिए आमदनी का एकमात्र साधन बंद हो गया। इस बीच किसी तरह घर का खर्च चलता रहा। लॉकडाउन में प्रशासन ने सब्जी बेचने वालों को ठेले पर घर घर सब्जी बेचने की इजाजत दी थी। 15 वर्षीय सैफ के मन में यह बात आई कि पुश्तैनी दुकान तो बंद है, जिसके अभी खुलने के आसार नहीं हैं। यदि वह सब्जी बेचे तो उसे कोई रोकेगा नहीं। फिर क्या था उसने देवनाथपुर निवासी अपने फूफा अफसर के 12 वर्षीय बेटे सोनू को बुलवाया और उसको साथ लेकर ठेले पर सब्जी बेचने लगा।
बुधवार को पीरखांपुर में सब्जी बेचते दोनों बच्चों ने अपनी दुख भरी कहानी सुनाई। सैफ ने बताया कि कभी डेढ़ सौ तो कभी दो सौ रुपया बना लेता है। पिता की दुकान खुल जाएगी तब सोचेंगे कि सब्जी वाली दुकान चलाऊं या नहीं। फिलहाल तो उन्हें सब्जी बेचने का काम रास आ रहा है।