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केएनपीजी : छात्रवृत्ति आवेदन करने वाले 65 फीसदी के फॉर्म संदिग्ध

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छात्रवृ​त्ति आवेदन संदिग्ध होने के बाद प्राचार्य प्रो. रमेश को ज्ञापन सौंपते विद्यार्थी। स्रोत
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ज्ञानपुर। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले 65 फीसदी विद्यार्थियों के फॉर्म को सस्पेक्टेड (संदिग्ध) कर दिया गया है। छात्रवृत्ति आवेदन फॉर्म में त्रुटियां दिखाकर करीब 2516 विद्यार्थियों का फॉर्म संदिग्ध श्रेणी में डाला गया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में विद्यार्थी महाविद्यालय पहुंचकर आक्रोश व्यक्त किया। अभ्यर्थियों के अनुसार फॉर्म में संशोधन किए जाने के बाद भी उनके आवेदन को अलग-अलग कारणों से संदिग्ध कर दिए गए हैं। विद्यार्थियों ने छात्रवृत्ति में अनियमितता का आरोप लगाया। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में इस समय विद्यार्थियों की संख्या करीब 6800 के आसपास है। इसमें करीब 4200 विद्यार्थियों ने छात्रवृत्ति के लिए आवेदन फॉर्म भरा था। आवेदन के उपरांत छात्रों ने आय व जाति प्रमाण पत्र के साथ लास्ट सेमेस्टर का अंक पत्र जमा किया था। आवेदन के करीब एक महीने बाद फॉर्म संशोधन की तिथि निर्धारित की गई। इसमें 12 व 13 फरवरी के बीच वेबसाइट पर जाकर छात्रवृत्ति आवेदन की त्रुटियों को सुधारने का मौका दिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने आवेदन फॉर्म की त्रुटियों का सुधार किया। इस बीच 16 फरवरी को महाविद्यालय के सोशल मीडिया ग्रुप में एक लिस्ट भेजा जाता है। इसमें करीब 2516 अभ्यर्थियों के छात्रवृत्ति फॉर्म को सस्पेक्टेड कर दिया गया है। इसमें किसी का कोर्स, किसी की जाति तो किसी का आय प्रमाण पत्र को सस्पेक्टेड दिखाया गया है। आवेदन फार्म सस्पेक्टेड होने की जानकारी होते ही विद्यार्थियों में खलबली मच गई। मंगलवार को बड़ी संख्या में विद्यार्थी महाविद्यालय धमक पड़े और अनियमितता का आरोप लगाया। छात्रों ने प्राचार्य प्रो. रमेश चंद्र यादव को ज्ञापन सौंपा और दोबारा आवेदन फॉर्मों की जांच की मांग की। बताया कि इतनी बड़ी संख्या में छात्रवृत्रि फॉर्म संदिग्ध होना लापरवाही को दर्शाता है। सभी फॉर्मों की दोबारा जांच की जाए। जिससे विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिल सके।
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महाविद्यालय में बड़ी संख्या में छात्रों के छात्रवृत्ति आवेदन फार्म को सस्पेक्टेड दिखाया गया है। जिससे छात्र परेशान हैं। छात्रों की परेशानी को देखते हुए समाज कल्याण विभाग को पत्र लिखा गया है और दोबारा फार्मों की जांच की मांग की गई है। -प्रो. रमेश चंद्र यादव, प्राचार्य, केएनपीजी।
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