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जिला पंचायत अध्यक्षः भदोही में भाजपा ने अमित सिंह को बनाया प्रत्याशी, चुनाव जीते कोई भी मगर बनेगा इतिहास

Sun, 20 Jun 2021 06:30 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, भदोही

सार

भदोही जिले का प्रथम नागरिक बनने की कोशिशें तेज हो गईं हैं। कांग्रेस और बसपा जहां बैकफुट पर हैं, वहीं सपा-भाजपा ने अध्यक्षी के लिए पूरी ताकत लगा दी है। 2021 के चुनाव में अध्यक्षी कोई भी जीते, लेकिन इतिहास बनेगा। भाजपा जीती तो ढाई दशक का सूखा खत्म होगा, जबकि सपा के हाथ चाभी आई तो वर्चस्व कायम रहेगा। 
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जिला पंचायत अध्यक्षः भदोही में भाजपा ने अमित सिंह को बनाया प्रत्याशी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के उम्मीदवार की घोषणा कर दी। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के उम्मीदवार के रूप में वार्ड संख्या 24 से निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य अमित सिंह उर्फ प्रिंस के नाम की घोषणा की गई है। इधर, भदोही जिले का प्रथम नागरिक बनने की कोशिशें तेज हो गईं हैं।

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कांग्रेस और बसपा जहां बैकफुट पर हैं, वहीं सपा-भाजपा ने अध्यक्षी के लिए पूरी ताकत लगा दी है। 2021 के चुनाव में अध्यक्षी कोई भी जीते, लेकिन इतिहास बनेगा। भाजपा जीती तो ढाई दशक का सूखा खत्म होगा, जबकि सपा के हाथ चाभी आई तो वर्चस्व कायम रहेगा। अगर कोई निर्दल प्रत्याशी ने जीत दर्ज किया तो वह भी पहली बार होगा। 

1995 में जिला पंचायत का गठन होने के बाद राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियां कांग्रेस और भाजपा कभी लड़ाई में भी नहीं आ सकी। सपा-बसपा के बीच मुकाबला हुआ, लेकिन 2010 को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर समय सपा का ही अध्यक्ष रहा। चाहे वह पहले अध्यक्ष शिवकरन यादव हो या ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्र, एमएलसी रामलली मिश्र, रीना सोनकर और काजल यादव। सिर्फ 2010 में बसपा सरकार में श्यामला सरोज दो साल के लिए अध्यक्ष चुनी गईं।

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2012 में सपा की सरकार बनने पर उन्हें अपदस्थ कर रीना सोनकर अध्यक्ष बनीं। 25 साल के जिला पंचायत में 23 साल तक सपा ही काबिज रहीं। सपा के वर्चस्व के पीछे ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्र का काफी हाथ रहा। 2021 के चुनाव में विधायक विजय मिश्र के जेल में होने के कारण समीकरण पूरी तरह बदला नजर आ रहा है। भाजपा ने रविवार को प्रत्याशी की घोषणा कर दी है लेकिन दो प्रमुख दावेदारों में खींचतान लगी है।

सपा महीने भर पूर्व ही प्रत्याशी की घोषणा कर चुकी है। 2021 के चुनाव में जीत किसी की होगी लेकिन बनेगा इतिहास। भाजपा अध्यक्ष पद को हथियाने में सफल हुई तो 1995 से चल रहा उसका सूखा समाप्त हो जाएगा। सपा ने जीत दर्ज किया तो छठवीं बार उसका अध्यक्ष बनेगा। अगर कोई निर्दल प्रत्याशी  के हाथ अध्यक्षी की चाभी मिलती है तो वह भी पहली बार ही होगा। 
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